
उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में अपना घर बनाने का सपना देख रहे लोगों की जेब पर अब अतिरिक्त बोझ पड़ने वाला है, गाजियाबाद विकास प्राधिकरण (GDA) ने भवन निर्माण के नियमों में बड़ा बदलाव करते हुए सोलर पैनल (Solar Panels) और सिक्योरिटी डिपॉजिट (Security Deposit) को अनिवार्य कर दिया है, 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी हुए इन नियमों के बिना अब मकान का नक्शा पास कराना नामुमकिन होगा।
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क्या हैं नए नियम?
GDA के नए आदेश के मुताबिक, अब 200 वर्ग मीटर या उससे अधिक क्षेत्रफल वाले भूखंडों (Plots) पर मकान बनाने के लिए नक्शा पास कराते समय सोलर पैनल की जगह दिखाना अनिवार्य होगा। यदि नक्शे में सोलर एनर्जी का प्रावधान नहीं मिलता है, तो प्राधिकरण उसे तुरंत खारिज कर देगा।
सिक्योरिटी डिपॉजिट का नया गणित
मकान मालिक को केवल सोलर पैनल का वादा ही नहीं करना होगा, बल्कि गारंटी के तौर पर एक निश्चित राशि ‘सिक्योरिटी डिपॉजिट’ के रूप में GDA के पास जमा करानी होगी यह राशि प्लॉट के साइज के आधार पर तय की गई है:
- 200 से 500 वर्ग मीटर: ₹20,000 की सिक्योरिटी।
- 500 से 1000 वर्ग मीटर: ₹50,000 की सिक्योरिटी।
- 1000 से 5000 वर्ग मीटर: ₹1,00,000 की सिक्योरिटी।
- 5000 वर्ग मीटर से अधिक: ₹2,00,000 की सिक्योरिटी।
कब वापस मिलेगा आपका पैसा?
राहत की बात यह है कि यह पैसा स्थायी शुल्क नहीं है मकान का निर्माण पूरा होने के बाद जब मकान मालिक सोलर पैनल स्थापित कर लेगा, तब GDA की टीम साइट का निरीक्षण करेगी पैनल सही पाए जाने पर जमा की गई पूरी राशि वापस कर दी जाएगी।
पर्यावरण और ‘सोलर सिटी’ पर जोर
प्राधिकरण का कहना है कि इन नियमों का मुख्य उद्देश्य गाजियाबाद को एक ‘सोलर सिटी’ के रूप में विकसित करना है, इसके साथ ही नए भवनों में रेन वॉटर हार्वेस्टिंग (Rainwater Harvesting) सिस्टम को भी सख्ती से लागू किया जा रहा है, हालांकि, 200 वर्ग मीटर से छोटे प्लॉट वाले मध्यम वर्गीय परिवारों को इन अनिवार्य शर्तों से फिलहाल बाहर रखा गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इससे निर्माण की शुरुआती लागत तो बढ़ेगी, लेकिन भविष्य में बिजली बिलों में कमी और पर्यावरण संरक्षण के लिहाज से यह एक बड़ा कदम साबित होगा।
















