
देश के करोड़ों बैंक ग्राहकों और लाखों कर्मचारियों के बीच 5-डे बैंकिंग (5-Day Banking) को लेकर चर्चा एक बार फिर तेज हो गई है, इंडियन बैंक एसोसिएशन (IBA) और बैंक कर्मचारी यूनियनों के बीच सहमति बनने के बावजूद, केंद्र सरकार की ओर से अभी तक आधिकारिक मंजूरी (Notification) नहीं मिली है, इस देरी के कारण बैंकिंग सेक्टर में अनिश्चितता का माहौल है और कर्मचारी संगठनों ने विरोध की तैयारी भी शुरू कर दी है।
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क्या है वर्तमान स्थिति?
फिलहाल बैंकों में कामकाज पुराने नियमों के आधार पर ही चल रहा है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के मौजूदा दिशानिर्देशों के अनुसार:
- बैंक दूसरे और चौथे शनिवार को पूरी तरह बंद रहते हैं।
- पहले, तीसरे और पांचवें शनिवार को बैंकों में सामान्य दिनों की तरह कामकाज होता है।
- आने वाले 25 अप्रैल (चौथा शनिवार) को देश भर के बैंक बंद रहेंगे।
यूनियनों की मांग और सरकार की चुप्पी
यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (UFBU) पिछले कई वर्षों से सभी शनिवारों को अवकाश घोषित करने की मांग कर रहा है।
- हड़ताल की चेतावनी: जनवरी 2026 में बैंक कर्मचारियों ने इसी मांग को लेकर देशव्यापी हड़ताल की थी, अब यूनियनें मई और जून 2026 में फिर से बड़े आंदोलन और हड़ताल की योजना बना रही हैं।
- अतिरिक्त काम का प्रस्ताव: कर्मचारियों ने प्रस्ताव दिया है कि यदि 5-डे वर्किंग लागू होती है, तो वे सोमवार से शुक्रवार तक प्रतिदिन 40 मिनट अतिरिक्त काम करेंगे ताकि ग्राहकों को कोई असुविधा न हो।
- सरकार का रुख: वित्त मंत्रालय ने अब तक इस पर कोई हरी झंडी नहीं दी है, सूत्रों के मुताबिक, सरकार को डर है कि शनिवार की छुट्टी से फिजिकल बैंकिंग सेवाओं पर असर पड़ सकता है, खासकर उन ग्राहकों पर जो डिजिटल माध्यमों का उपयोग नहीं करते।
ग्राहकों के लिए क्या बदलेगा?
अगर सरकार मंजूरी देती है, तो बैंक सप्ताह में केवल 5 दिन खुलेंगे, हालांकि, एटीएम (ATM), नेट बैंकिंग और मोबाइल बैंकिंग जैसी डिजिटल सेवाएं सातों दिन और 24 घंटे चालू रहेंगी, जैसा कि अभी भी अवकाश के दिनों में होता है।
















