Join Youtube

ऑनलाइन पेमेंट करने वालों के आरबीआई ने बदले नियम! 15,000 की लिमिट के लिए नया वेरिफिकेशन नियम लागू

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने डिजिटल ट्रांजैक्शन को सुरक्षित बनाने और बढ़ते ऑनलाइन फ्रॉड पर लगाम लगाने के लिए एक बड़ा फैसला लिया है आरबीआई ने ई-मैंडेट (e-mandate) यानी ऑटो-डेबिट पेमेंट के नियमों में महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं, जो सीधे तौर पर करोड़ों बैंक ग्राहकों की जेब और उनकी सुरक्षा से जुड़े हैं

Published On:
ऑनलाइन पेमेंट करने वालों के आरबीआई ने बदले नियम! 15,000 की लिमिट के लिए नया वेरिफिकेशन नियम लागू
ऑनलाइन पेमेंट करने वालों के आरबीआई ने बदले नियम! 15,000 की लिमिट के लिए नया वेरिफिकेशन नियम लागू

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने डिजिटल ट्रांजैक्शन को सुरक्षित बनाने और बढ़ते ऑनलाइन फ्रॉड पर लगाम लगाने के लिए एक बड़ा फैसला लिया है आरबीआई ने ई-मैंडेट (e-mandate) यानी ऑटो-डेबिट पेमेंट के नियमों में महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं, जो सीधे तौर पर करोड़ों बैंक ग्राहकों की जेब और उनकी सुरक्षा से जुड़े हैं।

₹15,000 की लिमिट और नया वेरिफिकेशन सिस्टम

नए फ्रेमवर्क के तहत, अब ₹15,000 तक के रेकरिंग ट्रांजैक्शन (जैसे कि नेटफ्लिक्स, अमेज़न प्राइम या अन्य छोटे बिल) बिना हर बार ओटीपी (OTP) के ऑटो-डेबिट हो सकेंगे, हालांकि, जैसे ही भुगतान की राशि ₹15,000 की सीमा को पार करेगी, ग्राहकों के लिए एडिशनल फैक्टर ऑफ ऑथेंटिकेशन (AFA) यानी अतिरिक्त सत्यापन अनिवार्य हो जाएगा, इसका मतलब है कि ₹15,000 से ऊपर के हर ऑटो-पेमेंट के लिए अब ग्राहक को ओटीपी या पिन के जरिए अपनी मंजूरी देनी होगी।

इन भुगतानों के लिए मिली ₹1 लाख की छूट

आम जनता को राहत देते हुए आरबीआई ने कुछ विशेष श्रेणियों में इस लिमिट को बढ़ाया है, म्यूचुअल फंड (SIP), बीमा प्रीमियम का भुगतान और क्रेडिट कार्ड के बिल पेमेंट के लिए यह सीमा ₹1,00,000 तय की गई है, यानी ₹1 लाख तक के इन ट्रांजैक्शन के लिए ग्राहकों को बार-बार वेरिफिकेशन की प्रक्रिया से नहीं गुजरना पड़ेगा।

सुरक्षा के लिए ’24 घंटे पहले अलर्ट’ अनिवार्य

नए नियमों के अनुसार, अब बैंकों और पेमेंट गेटवे कंपनियों के लिए यह अनिवार्य होगा कि वे पैसा कटने से कम से कम 24 घंटे पहले ग्राहक को एक नोटिफिकेशन भेजें इस अलर्ट में ट्रांजैक्शन की राशि और मर्चेंट का नाम स्पष्ट होगा, ग्राहकों के पास इस नोटिफिकेशन के जरिए भुगतान को रद्द करने (Opt-out) का विकल्प भी मौजूद रहेगा।

प्रमुख बदलाव जो आपको जानने चाहिए

  •  किसी भी नए ऑटो-डेबिट मैंडेट को सेट करते समय पहले ट्रांजैक्शन के लिए ओटीपी वेरिफिकेशन अनिवार्य है।
  • यदि आप अपने मैंडेट की राशि या तारीख में कोई भी बदलाव करते हैं, तो आपको दोबारा सुरक्षा सत्यापन करना होगा।
  • आरबीआई ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि बैंक इस ई-मैंडेट सुविधा के लिए ग्राहकों से कोई भी अतिरिक्त शुल्क नहीं वसूलेंगे।

यह नया नियम यूपीआई (UPI), डेबिट-क्रेडिट कार्ड और सभी प्रीपेड वॉलेट्स पर लागू हो चुका है, जानकारों का मानना है कि इस कदम से अनचाहे सब्सक्रिप्शन और धोखाधड़ी वाले ट्रांजैक्शन पर प्रभावी रोक लगेगी।

RBI Eases E Mandate Rules
Author
info@sargujauniversity.in

Leave a Comment

संबंधित समाचार