Join Youtube

यूपी में इंडस्ट्रियल कॉरिडोर की तैयारी! 292 हेक्टेयर जमीन होगी अधिग्रहित; इन 3 गांवों के किसानों की चमकेगी किस्मत

मेरठ में गंगा एक्सप्रेसवे किनारे 292 हेक्टेयर जमीन पर नया इंडस्ट्रियल कॉरिडोर बनेगा। खड़खड़ी, छतरी व गोविंदपुरी गांव प्रभावित। किसान मुआवजे से नाराज, विरोध की आशंका। रोजगार व विकास की उम्मीदें भी।

Published On:

उत्तर प्रदेश सरकार ने गंगा एक्सप्रेसवे के साथ-साथ मेरठ जिले में एक बड़े औद्योगिक कॉरिडोर की योजना को गति दी है। हापुड़ रोड पर बसे खड़खड़ी, छतरी और गोविंदपुरी गांवों के आसपास करीब 292 हेक्टेयर जमीन चिह्नित की गई है। यह दूसरे चरण का हिस्सा है, जहां पहले चरण में पहले ही सैकड़ों हेक्टेयर जमीन पर काम शुरू हो चुका है। राज्य की एक्सप्रेसवे इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट अथॉरिटी इस परियोजना को लागू कर रही है, जिसका लक्ष्य निवेशकों को लुभाना और स्थानीय स्तर पर रोजगार पैदा करना है।

यूपी में इंडस्ट्रियल कॉरिडोर की तैयारी! 292 हेक्टेयर जमीन होगी अधिग्रहित; इन 3 गांवों के किसानों की चमकेगी किस्मत

परियोजना का विस्तार और आर्थिक महत्व

पहले चरण के सफल होने से उत्साहित प्रशासन अब दूसरे चरण में जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया तेज कर रहा है। कुल 453 करोड़ रुपये का बजट स्वीकृत हुआ है, जिसमें खेतों की कीमत के अलावा मकानों, पेड़-पौधों और अन्य संरचनाओं का मूल्य अलग से तय होगा।

एक बार पूरा होने पर यह कॉरिडोर देश-विदेश की कंपनियों के लिए आकर्षण का केंद्र बनेगा। हजारों नौकरियां सृजित होंगी, खासकर युवाओं के लिए, और आसपास के इलाकों में व्यापार वृद्धि होगी। योगी सरकार इसे राज्य को औद्योगिक केंद्र बनाने की दिशा में बड़ा कदम बता रही है। इसी तरह आगरा-लखनऊ, पूर्वांचल और बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे के किनारे भी ऐसे कॉरिडोर विकसित हो रहे हैं।

Also Read- बजट ₹1.5 लाख? तो भूल जाइए पेट्रोल खर्च! ये हैं देश की 5 बेस्ट इलेक्ट्रिक बाइक, जो देंगी दमदार रेंज और पैसा वसूल फीचर्स

किसानों की चिंताएं और विरोध की आशंका

हालांकि, योजना से सबसे ज्यादा प्रभावित किसान खुश नहीं हैं। इन गांवों के ग्रामीण अपनी उपजाऊ जमीनें छोड़ने को तैयार नहीं हैं, जहां गेहूं-गन्ना जैसी फसलें लहलहाती हैं। उनका कहना है कि प्रस्तावित मुआवजा बाजार मूल्य से काफी कम है। एक स्थानीय किसान नेता ने बताया कि कम से कम आठ गुना मुआवजा मिलना चाहिए, ताकि परिवार का भविष्य सुरक्षित रहे।

पहले चरण में कुछ किसानों ने सहमति दी, लेकिन अब बड़े पैमाने पर विरोध की आशंका है। इसी तरह कानपुर और बरेली जैसे क्षेत्रों में भी जमीन अधिग्रहण को लेकर टकराव देखा गया है। किसान संगठन चेतावनी दे रहे हैं कि बिना उचित पैकेज के आंदोलन तेज हो सकता है।

Author
info@sargujauniversity.in

Leave a Comment

संबंधित समाचार