राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत शुरू हुई छात्रों की डिजिटल पहचान योजना अब कई परिवारों के लिए सिरदर्द बन चुकी है। APAAR नामक यह यूनिक आईडी कार्ड छात्रों को उनकी पढ़ाई के रिकॉर्ड को डिजिटल रूप से सुरक्षित रखने का मौका देता है। लेकिन आधार कार्ड और स्कूल पोर्टल पर नाम की स्पेलिंग या जन्मतिथि में छोटी-मोटी गलतियां पूरी प्रक्रिया को रोक दे रही हैं। उत्तर प्रदेश से छत्तीसगढ़ तक सैकड़ों स्कूलों में बच्चे एडमिट कार्ड और परीक्षा फॉर्म के लिए परेशान हैं। अभिभावक कहते हैं कि स्कूल सहमति पत्र मांगते हैं, पर डेटा सही न होने से कुछ हो ही नहीं पा रहा।

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योजना का उद्देश्य
यह डिजिटल आईडी छात्रों के लिए क्रेडेंशियल वॉलेट की तरह काम करेगी, जहां सारी अकादमिक उपलब्धियां सुरक्षित रहेंगी। सरकार का लक्ष्य हर बच्चे को एक स्थायी डिजिटल पहचान देना है। फिर भी हकीकत में स्कूलों को आधार और सरकारी पोर्टल के डेटा में मेल न खाने की वजह से दौड़ना पड़ रहा है। कई जगहों पर 70 प्रतिशत से कम छात्र ही इस सुविधा तक पहुंच पाए हैं। त्योहारों और छुट्टियों ने काम को और धीमा कर दिया। अभिभावक शिकायत करते हैं कि स्कूल सहमति पत्र मांगते हैं, लेकिन पहले डेटा ठीक होना जरूरी है। पुराने रिकॉर्ड की कमजोरी और ट्रेंड कंप्यूटर स्टाफ की कमी मुख्य वजहें हैं।
समाधान के सरल कदम
समस्या दूर करने के लिए सबसे पहले स्कूल के UDISE प्लेटफॉर्म पर छात्र का विवरण जांचें। नाम या जन्मतिथि गलत हो तो प्रिंसिपल से तुरंत सुधार करवाएं। आधार में त्रुटि हो तो नजदीकी केंद्र जाकर अपडेट कराएं, ऑनलाइन अपॉइंटमेंट भी बुक कर सकते हैं। इसके बाद अभिभावक की सहमति वाला फॉर्म स्कूल को दें। अंत में आधिकारिक पोर्टल पर जाकर आईडी बनाएं। अगर फिर भी दिक्कत हो तो राज्य शिक्षा वेबसाइट या जवाहर नवोदय पोर्टल से मदद लें। ऑनलाइन वीडियो गाइड्स भी आसान तरीके सिखा सकते हैं। ये कदम पूरा करने पर प्रक्रिया सुचारू हो जाती है।
शिकायत दर्ज करने की पूरी प्रक्रिया
शिकायत का प्रोसेस चरणबद्ध तरीके से पूरा करें-
- स्कूल प्रिंसिपल को लिखित आवेदन दें, जिसमें छात्र का नाम और स्कूल कोड शामिल हो।
- जिला शिक्षा अधिकारी के ईमेल या ऑफिस में संपर्क करें।
- केंद्रीय हेल्पलाइन नंबर पर फोन करें या ईमेल भेजें, समस्या का पूरा विवरण संलग्न रखें।
- आईडी पोर्टल के शिकायत सेक्शन में ऑनलाइन फॉर्म भरें, ट्रैकिंग नंबर नोट करें।
- अंतिम चरण में केंद्रीय शिकायत पोर्टल पर शिक्षा श्रेणी चुनकर दर्ज करें।
यह पूरी प्रक्रिया अपनाने से मामला हल हो जाता है और ट्रैकिंग संभव रहती है।
आगे की राह
शिक्षा विभाग ने समय सीमा बढ़ाने के संकेत दिए हैं, खासकर मार्च 2026 तक। स्कूलों को जागरूकता शिविर लगाने चाहिए। अभिभावक सक्रिय रहें ताकि बच्चों का भविष्य डिजिटल व्यवस्था में न अटके। सही कदमों से यह योजना सफल हो सकती है, वरना कागजी जंजाल बन जाएगी। विशेषज्ञों की सलाह है कि स्कूल प्राचार्य खुद आगे आएं। डिजिटल भारत का सपना जमीनी स्तर पर साकार करने के लिए सामूहिक प्रयास जरूरी है।
















