
छत्तीसगढ़ के सरकारी गलियारों से इस वक्त की सबसे बड़ी खबर सामने आ रही है, राज्य शासन ने एक बड़ा फैसला लेते हुए आगामी तीन महीनों के लिए सभी सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों की छुट्टियों पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है, सरकार के इस अचानक आए आदेश के बाद प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया है।
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क्यों लिया गया यह कड़ा फैसला?
आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, राज्य में होने वाले ‘सुशासन तिहार’ और जनगणना 2026 जैसे अत्यंत महत्वपूर्ण कार्यों को समय सीमा के भीतर पूरा करने के लिए यह कदम उठाया गया है, विशेष रूप से 1 मई से 30 मई तक चलने वाले जनगणना के पहले चरण (मकान सूचीकरण) के दौरान कर्मचारियों की शत-प्रतिशत उपस्थिति अनिवार्य की गई है।
आदेश की मुख्य बातें
- सख्त पाबंदी: अगले 90 दिनों तक किसी भी प्रकार का अर्जित अवकाश (EL) स्वीकार नहीं किया जाएगा।
- अनुमति अनिवार्य: बेहद जरूरी होने पर केवल सक्षम अधिकारी की लिखित मंजूरी के बाद ही अवकाश मिल सकेगा।
- मुख्यालय न छोड़ने के निर्देश: बिना पूर्व सूचना के मुख्यालय छोड़ने वाले कर्मचारियों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
- ब्रेक-इन-सर्विस की चेतावनी: आदेश का उल्लंघन करने या बिना सूचना गायब रहने पर ‘सेवा में व्यवधान’ (Break in Service) जैसी सख्त कार्रवाई हो सकती है।
कर्मचारियों में बेचैनी
भीषण गर्मी और शादियों के सीजन के बीच आए इस आदेश ने कर्मचारियों की चिंता बढ़ा दी है, कई कर्मचारियों ने पहले से ही पारिवारिक आयोजनों के लिए छुट्टियां प्लान कर रखी थीं, जिन पर अब संकट के बादल मंडरा रहे हैं, हालांकि, प्रशासन का कहना है कि जनकल्याणकारी योजनाओं और जनगणना जैसे राष्ट्रीय महत्व के कार्यों में किसी भी तरह की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
















