
किसी परिजन के निधन के बाद परिवार कई भावनात्मक और कानूनी जिम्मेदारियों से घिरा होता है, इन्हीं जिम्मेदारियों में से एक है मृतक के दस्तावेजों का सही निपटान, अक्सर लोग मृतक का पैन (PAN) कार्ड संभालकर रख लेते हैं या उसे यूं ही छोड़ देते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि ऐसा करना आपको मुसीबत में डाल सकता है?
Table of Contents
क्यों जरूरी है पैन कार्ड सरेंडर करना?
विशेषज्ञों के अनुसार, सक्रिय पैन कार्ड का दुरुपयोग कई गलत गतिविधियों के लिए किया जा सकता है:
- वित्तीय धोखाधड़ी का डर: सक्रिय पैन का उपयोग कर जालसाज मृतक के नाम पर बैंक खाते खोल सकते हैं, लोन ले सकते हैं या गलत तरीके से रिफंड क्लेम कर सकते हैं।
- इनकम टैक्स नोटिस: यदि मृतक के पैन पर कोई वित्तीय गतिविधि होती है और आईटीआर (ITR) दाखिल नहीं किया जाता, तो विभाग उत्तराधिकारियों को नोटिस भेज सकता है।
- संपत्ति स्थानांतरण: बैंक खाते बंद करने या संपत्ति को कानूनी वारिसों के नाम करने के लिए पैन को आधिकारिक तौर पर बंद करना प्रक्रिया को आसान बनाता है।
सरेंडर करने से पहले ये काम है जरूरी
पैन कार्ड सरेंडर करने की प्रक्रिया शुरू करने से पहले, कानूनी उत्तराधिकारी को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि:
- अंतिम आईटीआर: मृतक की मृत्यु की तिथि तक का अंतिम इनकम टैक्स रिटर्न भरा जा चुका हो।
- टैक्स क्लियरेंस: मृतक के नाम पर कोई टैक्स बकाया न हो।
- खाते बंद हों: मृतक से जुड़े सभी बैंक और डीमैट खाते या तो बंद हो चुके हों या उत्तराधिकारी के नाम ट्रांसफर हो गए हों।
स्टेप-बाय-स्टेप प्रोसेस (ऑफलाइन माध्यम)
चूंकि मृतक का पैन कार्ड मुख्य रूप से ऑफलाइन ही सरेंडर किया जाता है, इसके लिए निम्नलिखित चरणों का पालन करें:
- एप्लीकेशन लिखें: अपने क्षेत्र के असेसिंग ऑफिसर (AO) को संबोधित करते हुए एक आवेदन पत्र लिखें।
- विवरण दें: पत्र में मृतक का नाम, पैन नंबर, जन्मतिथि और मृत्यु का कारण स्पष्ट रूप से लिखें।
- दस्तावेज जोड़ें: आवेदन के साथ मृतक के मृत्यु प्रमाण पत्र (Death Certificate) की कॉपी, मूल पैन कार्ड और अपना (उत्तराधिकारी) पहचान पत्र संलग्न करें।
- पावती लें: आवेदन जमा करने के बाद विभाग से रिसीविंग या एक्नॉलेजमेंट कॉपी जरूर लें।
















