
मध्य प्रदेश की एक बड़ी सड़क परियोजना ‘ईस्टर्न बायपास’ को लेकर बड़ी खबर सामने आई है, इंदौर हाईकोर्ट ने देवास से पीथमपुर (नांदेड़) के बीच बनने वाली 77 किलोमीटर लंबी सिक्स-लेन सड़क के लिए हो रहे जमीन अधिग्रहण पर फिलहाल अंतरिम रोक लगा दी है, कोर्ट के इस आदेश ने ₹2100 करोड़ के इस मेगा प्रोजेक्ट की रफ्तार पर फिलहाल ब्रेक लगा दिया है।
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क्या है पूरा मामला?
भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) द्वारा बनाए जा रहे इस बायपास के लिए करीब 74 गांवों की 640 हेक्टेयर जमीन का अधिग्रहण किया जाना है, इस प्रक्रिया के खिलाफ ‘भारतीय किसान यूनियन (सूर्यवंशी)’ ने जनहित याचिका दायर की थी, याचिका में आरोप लगाया गया कि NHAI ने अधिग्रहण की अधिसूचना में नियमों की अनदेखी की है।
कोर्ट ने क्यों लगाई रोक?
जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी की बेंच ने मामले की सुनवाई करते हुए पाया कि अधिसूचना में तकनीकी खामियां हैं:
- अस्पष्ट जानकारी: याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि NHAI ने केवल खसरा नंबरों का उल्लेख किया है, लेकिन यह नहीं बताया कि उस जमीन के किस हिस्से (चौहद्दी) को लिया जा रहा है।
- कानूनी उल्लंघन: कोर्ट को बताया गया कि ‘नेशनल हाईवे एक्ट’ के तहत अधिग्रहित की जाने वाली भूमि की सटीक जानकारी देना अनिवार्य है, ताकि किसान अपनी आपत्ति दर्ज करा सकें। स्पष्टता न होने के कारण किसान भ्रमित हैं।
प्रोजेक्ट पर असर
हाईकोर्ट ने इस मामले में केंद्र सरकार और NHAI को नोटिस जारी कर 4 सप्ताह के भीतर जवाब तलब किया है, तब तक के लिए जमीन के कब्जे को लेकर ‘यथावत स्थिति’ (Status Quo) बनाए रखने के निर्देश दिए गए हैं, इसका सीधा मतलब यह है कि अब सरकार कोर्ट के अगले आदेश तक किसानों से जमीन का कब्जा नहीं ले सकेगी।
अहम जानकारी
- प्रोजेक्ट लागत: लगभग ₹2100 करोड़।
- प्रभावित गांव: इंदौर और देवास जिले के 74 गांव।
- प्रस्तावित मार्ग: देवास के पीर कराडि़या से पीथमपुर के पास नांदेड़ तक।
इस रोक के बाद अब सबकी नजरें NHAI के जवाब पर टिकी हैं, अगर विभाग कोर्ट को संतुष्ट नहीं कर पाता है, तो प्रोजेक्ट की समयसीमा में भारी देरी होने की संभावना है।
















