बिहार सरकार ने शिक्षा के क्षेत्र में एक क्रांतिकारी कदम उठाया है। 10वीं कक्षा की बोर्ड परीक्षा में प्रथम श्रेणी से उत्तीर्ण होने वाले छात्रों और छात्राओं को दस हजार रुपये की नकद राशि प्रदान की जा रही है। मुख्यमंत्री बालक बालिका प्रोत्साहन योजना के तहत यह लाभ सीधे बैंक खातों में हस्तांतरित हो रहा है। 2025 के बिहार बोर्ड परीक्षा पास करने वाले युवाओं के लिए भुगतान प्रक्रिया तेजी से चल रही है, जिससे ग्रामीण इलाकों में खुशी की लहर दौड़ गई है।

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योजना का लक्ष्य और महत्व
यह पहल गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों के बच्चों को उच्च शिक्षा की ओर प्रेरित करने के उद्देश्य से शुरू की गई है। राज्य के स्थायी निवासियों को निशाना बनाते हुए योजना परिवार की वार्षिक आय डेढ़ लाख रुपये से कम रखने पर जोर देती है। प्रथम श्रेणी प्राप्त करने वाले सभी छात्रों को दस हजार रुपये का एकमुश्त लाभ मिलता है। अनुसूचित जाति और जनजाति वर्ग के छात्रों को द्वितीय श्रेणी में भी आठ हजार रुपये का प्रोत्साहन दिया जाता है। सरकारी स्कूलों के अविवाहित छात्र ही इसके हकदार हैं, और उम्र सीमा अठारह से पैंतीस वर्ष के बीच निर्धारित है। इस तरह शिक्षा में निरंतरता बनाए रखना इसका मुख्य मकसद है।
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पात्रता के नियम साफ और सरल
आवेदक को बिहार का मूल निवासी होना अनिवार्य है। बोर्ड परीक्षा में कम से कम साठ प्रतिशत अंक यानी प्रथम श्रेणी लाना जरूरी होता है। परिवार की आय का प्रमाण पत्र, आधार कार्ड, मार्कशीट और बैंक खाते की जानकारी के साथ आवेदन स्वीकार किया जाता है। यह प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन है, जो पारदर्शिता सुनिश्चित करती है। 2025 सत्र के लिए आवेदन की समय सीमा हाल ही में समाप्त हुई, और अब सत्यापन के बाद राशि वितरण तेज हो गया है। कई छात्रों ने बताया कि उनके खातों में राशि आ चुकी है, जो कॉलेज फीस या किताबों के लिए बड़ी राहत साबित हो रही है।
आवेदन कैसे करें और अपडेट कैसे लें
आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर आसानी से फॉर्म भर सकते हैं। आवश्यक दस्तावेज अपलोड करने के बाद स्थिति का पता लगाने के लिए पोर्टल पर लॉगिन करें। हाल के महीनों में तकनीकी सुधारों से देरी की समस्या कम हुई है। सरकार ने सभी वैध दावों पर शीघ्र कार्रवाई का भरोसा दिलाया है। छात्रों को सलाह दी जाती है कि वे नियमित रूप से पोर्टल चेक करें और दस्तावेज अपडेट रखें।
















