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copy Re-totalling vs Revaluation: क्या फर्क है दोनों में और आपको क्या चुनना चाहिए? अपनी मार्कशीट के नंबर बढ़वाने का सही तरीका।

बोर्ड रिजल्ट के बाद कन्फ्यूजन खत्म! कौन सा ऑप्शन चुनें ताकि मार्क्स बढ़ें, पैसे बचें और रिस्क न हो? सस्ता-सुरक्षित तरीका जानें, लाखों स्टूडेंट्स की गलती से बचें। 5 मिनट पढ़ें, स्मार्ट डिसीजन लें!

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बोर्ड परीक्षाओं के नतीजे आने के बाद छात्रों के चेहरों पर खुशी और चिंता का मिश्रण दिखाई देता है। खासकर वे जो अपेक्षा से कम अंक लाए हैं। ऐसे में दो विकल्प सामने आते हैं। एक तरफ री टोटलिंग तो दूसरी ओर रीवैल्यूएशन। कई छात्र भ्रम में फंस जाते हैं कि कौन सा रास्ता अपनाएं। गलत फैसले से नुकसान हो सकता है। आइए जानते हैं इनके बीच का फर्क और सही चयन का तरीका क्या है।

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री टोटलिंग का मतलब

री टोटलिंग में आपकी उत्तर पुस्तिका के दिए गए अंकों को दोबारा गिना जाता है। इसका उद्देश्य सिर्फ गणना में गलती ढूंढना है। क्या सभी सवालों के नंबर सही जोड़े गए। क्या कोई अंक छूटा या दोगुना जोड़ा गया। यह प्रक्रिया तेज होती है। ज्यादातर बोर्डों में सात से पंद्रह दिनों में नतीजा आ जाता है। फीस भी मामूली रहती है। प्रति विषय सौ से दो सौ रुपये तक। बदलाव की गुंजाइश कम होती है। अक्सर शून्य या दो चार अंकों का इजाफा ही संभव है। नुकसान का खतरा न के बराबर। इसलिए यह पहला कदम माना जाता है।

रीवैल्यूएशन की प्रक्रिया

रीवैल्यूएशन पूरी तरह अलग स्तर की जांच है। यहां नया परीक्षक आपकी कॉपी को शुरू से अंत तक परखता है। उत्तर सही हैं या नहीं। चिह्नन का तरीका उचित था या नहीं। प्रस्तुति पर अंक कटौती हुई या अनुचित अंक दिए गए। सब कुछ दोबारा मूल्यांकित होता है। अच्छे उत्तरों पर इजाफा हो सकता है। कभी कभी दस से बीस प्रतिशत तक सुधार संभव। लेकिन जोखिम भी बड़ा। नया मूल्यांकन सख्त हो सकता है। अंक घटने की आशंका रहती है। फीस अधिक होती है। पांच सौ से एक हजार रुपये प्रति विषय। समय भी ज्यादा लगता है। पंद्रह से तीस दिन।

दोनों की तुलना

देखें इनकी मुख्य भिन्नताएं। री टोटलिंग सिर्फ गिनती पर केंद्रित। रीवैल्यूएशन उत्तर की गुणवत्ता जांचती है। पहले में बदलाव न्यूनतम। दूसरे में उतार चढ़ाव अधिक। लागत में भी अंतर। री टोटलिंग सस्ती। रीवैल्यूएशन महंगी। समय के लिहाज से भी पहला विकल्प बेहतर। जोखिम की बात करें तो री टोटलिंग सुरक्षित। रीवैल्यूएशन में सावधानी जरूरी। छात्र अनुभव बताते हैं कि गणित विज्ञान जैसे विषयों में सतर्क रहें।

कब क्या चुनें?

विशेषज्ञ सलाह यही है। पहले री टोटलिंग कराएं। अगर संतुष्टि न मिले तो आगे बढ़ें। उत्तर पुस्तिका की प्रतिलिपि पहले प्राप्त करें। शिक्षक से जांच करवाएं। क्या वाकई कम अंक गलत लग रहे। यूपी बोर्ड या अन्य राज्य बोर्डों में यह सुविधा उपलब्ध। फीस दो सौ से पांच सौ रुपये। समय सीमा का ध्यान रखें। नतीजे आने के तीन से सात दिन में आवेदन करें। ऑनलाइन पोर्टल सक्रिय रहते हैं। फीस जमा करने में देरी न करें।

सावधानियां बरतें

छात्रों को जल्दबाजी से बचना चाहिए। कोचिंग केंद्रों के दावों पर भरोसा न करें। वे अतिरिक्त फीस वसूलते हैं। स्वयं बोर्ड वेबसाइट जांचें। अभिभावक मार्गदर्शन दें। आर्थिक बोझ कम रखें। लाखों छात्र हर साल आवेदन करते हैं। सही योजना से सफलता मिलती है। मोरादाबाद जैसे क्षेत्रों में जागरूकता अभियान चल रहे। स्थानीय स्कूल सलाह केंद्र खोले गए।

सही कदम से भविष्य संवरता है। री टोटलिंग सुरक्षित शुरुआत। रीवैल्यूएशन अंतिम प्रयास। सोच समझकर फैसला लें। सपनों का कॉलेज आपके हाथों में।

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Author
info@sargujauniversity.in

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