
तलाक के समय गहनों और उपहारों पर मालिकाना हक को लेकर अक्सर विवाद होता है, लेकिन कानून इस मामले में बहुत स्पष्ट है, भारतीय कानून के अनुसार, शादी के दौरान मिले गहने और उपहार ‘स्त्रीधन’ (Stridhan) कहलाते हैं, और इन पर केवल पत्नी का ही पूर्ण अधिकार होता है।
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पत्नी किन चीजों को वापस ले सकती है?
तलाक की स्थिति में पत्नी निम्नलिखित वस्तुओं पर अपना दावा कर सकती है:
- मायके से मिले उपहार: शादी से पहले या बाद में माता-पिता, रिश्तेदारों और दोस्तों द्वारा दिए गए सभी जेवर, कपड़े और नकद।
- ससुराल से मिले उपहार: पति या ससुराल पक्ष (जैसे सास-ससुर) द्वारा शादी की रस्मों (मुंह दिखाई आदि) में दिए गए गहने और सामान।
- स्वयं की आय से खरीदी संपत्ति: महिला ने अपनी नौकरी या व्यवसाय की कमाई से जो भी गहने या संपत्तियां खरीदी हों।
- संयुक्त संपत्ति: यदि कोई संपत्ति (जैसे घर या प्लॉट) पत्नी के नाम पर है या वह उसमें सह-मालिक है।
कानूनी अधिकार और सुरक्षा
- पूर्ण स्वामित्व: सुप्रीम कोर्ट के फैसलों के अनुसार, स्त्रीधन पर पति या उसके परिवार का कोई अधिकार नहीं होता पत्नी इसे अपनी मर्जी से खर्च या इस्तेमाल कर सकती है।
- वापसी का अधिकार: यदि ससुराल वाले स्त्रीधन को अपने पास रोक कर रखते हैं, तो पत्नी भारतीय कानून के तहत ‘अपराधिक विश्वासघात’ (Criminal Breach of Trust) का मामला दर्ज करा सकती है।
- अदालती रुख: हिमाचल हाई कोर्ट समेत कई अदालतों ने साफ किया है कि तलाक के बाद भी महिला अपने स्त्रीधन की मांग कर सकती है।
किन चीजों पर पत्नी का हक नहीं होता?
- पति के निजी उपहार: वे उपहार जो विशेष रूप से केवल पति को दिए गए थे।
- पति की पैतृक संपत्ति: पति को विरासत में मिली संपत्ति पर पत्नी का सीधा हक नहीं होता, हालांकि वह भरण-पोषण (Alimony) की मांग कर सकती है।
कानूनी जटिलताओं से बचने के लिए शादी के समय मिलने वाले सभी उपहारों और गहनों की एक सूची (Inventory) बनाना और उनके फोटो या रसीदें संभाल कर रखना भविष्य में मददगार साबित होता है।
















