
किसी भी व्यक्ति की मृत्यु के बाद ‘मृत्यु प्रमाण पत्र’ (Death Certificate) सबसे महत्वपूर्ण कानूनी दस्तावेजों में से एक बन जाता है, अक्सर लोग दुख की घड़ी में इसे बनवाना भूल जाते हैं, लेकिन इसकी अनुपस्थिति में भविष्य में कई कानूनी और वित्तीय कार्यों में बड़ी बाधाएं आ सकती हैं, केंद्र सरकार की डिजिटल इंडिया मुहिम के तहत अब इसे घर बैठे ऑनलाइन बनवाना बेहद आसान हो गया है।
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क्यों जरूरी है डेथ सर्टिफिकेट?
मृत्यु प्रमाण पत्र केवल एक कागज़ नहीं, बल्कि मृतक की संपत्ति और दावों के निपटारे के लिए अनिवार्य प्रमाण है। इसके बिना निम्नलिखित काम रुक सकते हैं:
- बीमा क्लेम (Insurance Claim): जीवन बीमा या अन्य पॉलिसी का लाभ लेने के लिए इसका होना अनिवार्य है।
- संपत्ति का हस्तांतरण: पैतृक संपत्ति, बैंक खाते या जमीन को उत्तराधिकारियों के नाम ट्रांसफर करने के लिए इसकी जरूरत पड़ती है।
- पेंशन लाभ: मृतक के जीवनसाथी या परिवार के लिए पेंशन शुरू करवाने हेतु यह प्राथमिक दस्तावेज है।
- कानूनी उत्तराधिकार: उत्तराधिकार तय करने और कोर्ट-कचहरी से जुड़े कार्यों में इसकी मांग की जाती है।
ऑनलाइन आवेदन के लिए जरूरी दस्तावेज
आवेदन करते समय आपके पास निम्नलिखित दस्तावेजों की जानकारी या स्कैन कॉपी होनी चाहिए:
- मृतक का आधार कार्ड, राशन कार्ड या वोटर आईडी।
- अस्पताल द्वारा जारी मृत्यु की रिपोर्ट (यदि मृत्यु अस्पताल में हुई हो)।
- मृतक का जन्म प्रमाण पत्र या आयु प्रमाण (यदि उपलब्ध हो)।
- आवेदक का पहचान पत्र और मृतक के साथ संबंध का प्रमाण।
स्टेप-बाय-स्टेप ऑनलाइन प्रक्रिया
मृत्यु के 21 दिनों के भीतर पंजीकरण कराना निशुल्क और सरल है, आप आधिकारिक पोर्टल crsorgi.gov.in के माध्यम से आवेदन कर सकते हैं:
- सबसे पहले आधिकारिक पोर्टल Civil Registration System (CRS) पर लॉगिन करें।
- यदि आप नए उपयोगकर्ता हैं, तो ‘General Public’ विकल्प चुनकर साइन-अप करें।
- ‘Death Registration’ टैब पर क्लिक करें और मृतक का नाम, मृत्यु की तिथि, स्थान और परिजनों की जानकारी सावधानीपूर्वक भरें।
- मांगे गए आवश्यक दस्तावेजों को स्कैन करके अटैच करें।
- फॉर्म सबमिट करने के बाद आपको एक ‘एप्लीकेशन नंबर’ मिलेगा, जिससे आप भविष्य में स्टेटस चेक कर सकते हैं।
- वेरिफिकेशन के बाद डिजिटल रूप से हस्ताक्षरित प्रमाण पत्र इसी पोर्टल या DigiLocker से डाउनलोड किया जा सकता है।
यदि मृत्यु को हुए 21 दिन से अधिक समय बीत चुका है, तो विलंब शुल्क और मजिस्ट्रेट की अनुमति जैसे अतिरिक्त नियमों का पालन करना होगा।
















