
भारत के राज्यों का इतिहास काफी दिलचस्प रहा है, जहां कुछ राज्य हाल के दशकों में बने, वहीं कुछ की जड़ें ब्रिटिश शासन काल से जुड़ी हैं आधिकारिक स्थापना और पुनर्गठन की तारीखों के आधार पर यहाँ भारत के 10 सबसे पुराने राज्यों की सूची दी गई है।
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बिहार (22 मार्च, 1912)
बिहार भारत का सबसे पुराना राज्य माना जाता है, इसे ब्रिटिश काल में बंगाल से अलग कर एक नए प्रांत के रूप में स्थापित किया गया था, यही कारण है कि बिहार हर साल 22 मार्च को अपना स्थापना दिवस मनाता है।
ओडिशा (1 अप्रैल, 1936)
आजादी से पहले, 1936 में ही ओडिशा को बिहार और उड़ीसा प्रांत से अलग कर दिया गया था, इसे भाषाई आधार पर अलग होने वाले शुरुआती प्रांतों में गिना जाता है।
उत्तर प्रदेश (24 जनवरी, 1950)
स्वतंत्रता के बाद ‘यूनाइटेड प्रोविंस’ (संयुक्त प्रांत) का नाम बदलकर उत्तर प्रदेश कर दिया गया, इसकी स्थापना तिथि 24 जनवरी को ‘यूपी दिवस’ के रूप में मनाई जाती है।
तमिलनाडु (26 जनवरी, 1950)
मद्रास प्रेसीडेंसी का हिस्सा रहे इस राज्य को गणतंत्र दिवस के दिन राज्य की मान्यता मिली, बाद में 1956 में भाषाई आधार पर इसकी सीमाएं फिर से तय की गईं।
असम (26 जनवरी, 1950)
असम का इतिहास बहुत पुराना है, लेकिन आधुनिक भारत के नक्शे पर इसे 1950 में पूर्ण राज्य का दर्जा मिला, ब्रिटिश काल में 1874 में ही इसे बंगाल से अलग कर एक प्रशासनिक इकाई बना दिया गया था।
पश्चिम बंगाल (26 जनवरी, 1950)
1947 में विभाजन के समय बंगाल दो हिस्सों में बंट गया था, पूर्वी हिस्सा पाकिस्तान (अब बांग्लादेश) बना और पश्चिमी हिस्सा भारत का राज्य बना, जिसे 1950 में संवैधानिक दर्जा प्राप्त हुआ।
आंध्र प्रदेश (1 नवंबर, 1956)
आजादी के बाद भाषाई आधार पर बनने वाला यह पहला राज्य था, हालांकि इसकी शुरुआती स्थापना 1953 में हुई थी, लेकिन पुनर्गठन अधिनियम के बाद 1956 में इसे वर्तमान पहचान मिली।
केरल (1 नवंबर, 1956)
केरल का गठन मालाबार, कोचीन और त्रावणकोर क्षेत्रों को मिलाकर किया गया था, दक्षिण भारत के इस राज्य ने शिक्षा और विकास के मामले में अपनी अलग पहचान बनाई है।
कर्नाटक (1 नवंबर, 1956)
इसे पहले ‘मैसूर राज्य’ के नाम से जाना जाता था, 1956 में कन्नड़ भाषी क्षेत्रों को एकीकृत कर इसे नया रूप दिया गया और 1973 में इसका नाम बदलकर कर्नाटक किया गया।
राजस्थान (1 नवंबर, 1956)
राजपूताना की विभिन्न रियासतों को एक साथ लाने की प्रक्रिया 1949 में शुरू हुई थी, लेकिन 1 नवंबर 1956 को राज्य पुनर्गठन के साथ राजस्थान अपने पूर्ण और अंतिम स्वरूप में आया।
इन राज्यों का गठन न केवल प्रशासनिक सुविधा के लिए किया गया, बल्कि इनमें भारत की सांस्कृतिक और भाषाई विविधता की झलक भी मिलती है।
















