
प्राइवेट सेक्टर के करोड़ों कर्मचारियों के लिए कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) ने एक महत्वपूर्ण बदलाव किया है, आयकर अधिनियम, 2025 के तहत 1 अप्रैल 2026 से पीएफ निकासी (EPF Withdrawal) के समय टैक्स कटौती (TDS) बचाने के पुराने नियम बदल गए हैं, अब करदाताओं को वर्षों से चले आ रहे फॉर्म 15G और 15H की जगह केवल एक एकीकृत फॉर्म 121 (Form 121) जमा करना होगा।
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क्या है नया नियम और क्यों हुआ बदलाव?
नए नियमों के अनुसार, अब आयु के आधार पर अलग-अलग फॉर्म भरने का झंझट खत्म कर दिया गया है। पहले 60 साल से कम उम्र वालों के लिए फॉर्म 15G और वरिष्ठ नागरिकों के लिए फॉर्म 15H का प्रावधान था। सरकार ने टैक्स प्रक्रिया को सरल और ‘स्मार्ट’ बनाने के उद्देश्य से इन दोनों को मिलाकर फॉर्म 121 पेश किया है।
किसे भरना होगा यह फॉर्म?
यह फॉर्म उन सभी भारतीय निवासी खाताधारकों के लिए है जिनकी उस वित्त वर्ष की कुल अनुमानित आय टैक्स छूट की सीमा से कम है और टैक्स देनदारी शून्य है।
- अनिवार्यता: यदि आपकी सेवा 5 साल से कम है और आप 50,000 रुपये से अधिक की राशि निकाल रहे हैं, तो टीडीएस से बचने के लिए यह फॉर्म जमा करना जरूरी है।
- पात्रता: कंपनियां, फर्में और एनआरआई (NRIs) इस फॉर्म का उपयोग नहीं कर सकते।
फॉर्म जमा न करने पर कितना कटेगा टैक्स?
अगर कोई पात्र सदस्य फॉर्म 121 जमा नहीं करता है, तो निकासी पर 10% TDS काटा जाएगा (पैन कार्ड होने की स्थिति में) यदि सदस्य के पास पैन कार्ड नहीं है, तो यह कटौती अधिकतम मार्जिनल रेट (लगभग 34.6%) तक हो सकती है।
मुख्य विशेषताएं
- UIN की सुविधा: फॉर्म सबमिट करने पर EPFO द्वारा एक यूनीक आइडेंटिफिकेशन नंबर (UIN) जारी किया जाएगा, जिससे फॉर्म को आसानी से ट्रैक किया जा सकेगा।
- बहुउद्देश्यीय उपयोग: यह फॉर्म न केवल पीएफ निकासी, बल्कि बैंक ब्याज (FD), रेंट और इंश्योरेंस कमीशन पर टीडीएस बचाने के लिए भी इस्तेमाल होगा।
- पुराने आवेदनों का क्या? EPFO ने स्पष्ट किया है कि 1 अप्रैल के बाद 15G/15H के साथ दाखिल दावों को तुरंत खारिज नहीं किया जाएगा, लेकिन सदस्यों को अलग से फॉर्म 121 देना होगा।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह बदलाव डिजिटल अनुपालन को बढ़ावा देगा और टैक्सपेयर्स के लिए डेटा वेरिफिकेशन को आसान बनाएगा। =
















