उत्तर प्रदेश में बेटियों के संपत्ति अधिकार मजबूत करने की दिशा में योगी आदित्यनाथ सरकार बड़ा कदम उठाने वाली है। पुरानी उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता 2006 की धारा 108(2) में बदलाव का प्रस्ताव तैयार है। इसके तहत शादीशुदा बेटियां भी पिता की कृषि भूमि में भाइयों के बराबर हिस्सा पा सकेंगी। यह कदम ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाएगा और लैंगिक समानता को नई ऊंचाई देगा।

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पुराने कानून की कमियां
अभी तक का नियम पुरुष प्रधान सोच को दर्शाता है। पुरुष भूमिधर की मृत्यु पर कृषि जमीन का हस्तांतरण सिर्फ विधवा, पुत्र और अविवाहित पुत्री के नाम होता रहा है। शादीशुदा बेटियां इससे वंचित रह जाती हैं, चाहे उनकी आर्थिक स्थिति कितनी भी कमजोर हो। कई बार न्यायालयों ने इसे भेदभावपूर्ण बताया। राजस्व विभाग ने इस कमी को दूर करने का फैसला लिया। अब धारा से विवाहित और अविवाहित जैसे भेदभाव वाले शब्द हटाए जाएंगे। इससे सभी बेटियां समान अधिकार प्राप्त करेंगी।
प्रस्ताव कैसे बनेगा कानून
राजस्व परिषद ने सितंबर 2025 में यह प्रस्ताव शासन को भेजा। कैबिनेट मंजूरी और विधानसभा बहस के बाद यह कानून बन जाएगा। योगी सरकार इसे जल्द सदन में लाने को तैयार है। मध्य प्रदेश और राजस्थान जैसे राज्यों ने पहले ही यह नियम लागू कर दिया, जहां विवाहित बेटियां पुत्रों के बराबर जमीन का हकदार हैं। उत्तर प्रदेश में लाखों परिवार प्रभावित होंगे, विशेषकर वे जहां बेटियां ससुराल जाने के बाद भी पैतृक संपत्ति पर दावा रखना चाहती हैं।
महिलाओं के लिए अन्य राहतें
योगी सरकार ने जनवरी 2026 में पैतृक संपत्ति बंटवारे और किरायेदारी करार पर स्टांप ड्यूटी बहुत कम कर दी। पहले सात प्रतिशत शुल्क लगता था, अब रजिस्ट्रेशन मात्र पांच से दस हजार रुपये में पूरा हो जाता है। इससे परिवारिक झगड़े कम होंगे और संपत्ति विभाजन सरल बनेगा। मुख्यमंत्री ने इसे महिलाओं को न्याय देने वाला कदम बताया। हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम 1956 के तहत तो बेटियां पहले से ही पैतृक संपत्ति की हकदार हैं, लेकिन कृषि जमीन पर राज्य नियम लागू होते हैं।
सामाजिक प्रभाव और चुनौतियां
यह बदलाव ग्रामीण महिलाओं की वित्तीय आजादी बढ़ाएगा। दहेज प्रथा जैसी बुराइयां कम हो सकती हैं। बेटियां आर्थिक रूप से मजबूत होंगी तो परिवार की दशा भी सुधरेगी। हालांकि पुरुषवादी सोच वाले परिवारों में विवाद उभर सकते हैं। सरकार को गांव-गांव जागरूकता अभियान चलाने होंगे। कानूनी सहायता केंद्र स्थापित करनी चाहिए ताकि बेटियां अपने हक के लिए आसानी से लड़ सकें।
योगी सरकार की यह नीति नारी सशक्तिकरण का प्रतीक बनेगी। उत्तर प्रदेश लैंगिक न्याय का नया उदाहरण प्रस्तुत करेगा। बेटियां अब संपत्ति में बराबर भागीदार होंगी।
















