
डिजिटल युग में सोशल मीडिया की लत को लेकर एक बेहद चौंकाने वाला और ऐतिहासिक फैसला सामने आया है, अमेरिका की एक अदालत ने दिग्गज टेक कंपनियों Meta (Instagram) और Alphabet (YouTube) को एक युवती के मानसिक स्वास्थ्य को गंभीर नुकसान पहुँचाने का दोषी पाया है, कोर्ट ने हर्जाने के तौर पर युवती को लगभग $3 मिलियन (करीब 24.5 करोड़ रुपये) देने का आदेश सुनाया है।
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क्या है पूरा मामला?
यह मामला 20 वर्षीय कैली जी.एम. (Kaley G.M.) से जुड़ा है, जिन्होंने इन सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ी थी। कैली का आरोप था कि उन्होंने मात्र 6 साल की उम्र में YouTube और 9 साल की उम्र में Instagram का इस्तेमाल शुरू कर दिया था। इन ऐप्स के ‘एडिक्टिव’ (लत लगाने वाले) डिजाइन के कारण वह इसकी ऐसी शिकार हुईं कि उन्हें एंग्जायटी, डिप्रेशन और ‘बॉडी डिस्मॉर्फिया’ (अपने शरीर को लेकर हीन भावना) जैसी गंभीर मानसिक बीमारियों ने घेर लिया।
कोर्ट का कड़ा रुख और ऐतिहासिक फैसला
लॉस एंजिल्स की जूरी ने इस मामले में सोशल मीडिया कंपनियों की जवाबदेही तय करते हुए माना कि इन प्लेटफॉर्म्स को जानबूझकर युवाओं को बांधे रखने के लिए डिजाइन किया गया है, जो उनके विकास के लिए हानिकारक है।
- जुर्माने का विवरण: जूरी ने Meta पर $2.1 मिलियन और Google/YouTube पर $900,000 का हर्जाना लगाया है।
- कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, यह फैसला टेक जगत के लिए ‘टोबैको मोमेंट’ (जैसे सिगरेट कंपनियों पर कड़े कानून बने थे) साबित हो सकता है।
टेक कंपनियों की प्रतिक्रिया
इस फैसले ने सिलिकॉन वैली में हड़कंप मचा दिया है, जहाँ एक तरफ इस जीत को बच्चों की सुरक्षा की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है, वहीं Meta और Google ने अदालत के इस फैसले पर असहमति जताई है, दोनों कंपनियों ने संकेत दिए हैं कि वे इस फैसले के खिलाफ ऊपरी अदालत में अपील करेंगी।
क्यों खास है यह फैसला?
यह दुनिया का अपनी तरह का पहला मामला है जहाँ किसी व्यक्ति ने सोशल मीडिया के ‘डिजाइन’ को अपनी लत और मानसिक स्थिति के लिए जिम्मेदार ठहराते हुए कोर्ट में जीत हासिल की है, इस फैसले के बाद अब दुनिया भर में इन कंपनियों के एल्गोरिदम और बच्चों की सुरक्षा नीतियों पर सवाल उठने शुरू हो गए हैं।
















