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जन्म पत्री अब नहीं चलेगी! दिल्ली हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, केवल ये सरकारी दस्तावेज ही माना जाएगा उम्र का असली सबूत

दिल्ली हाईकोर्ट ने फैसला दिया कि जन्म पत्री अब उम्र साबित नहीं करेगी। केवल सरकारी दस्तावेज जैसे जन्म प्रमाण पत्र ही मान्य होंगे। POCSO मामले में आरोपी को राहत मिली। यह बदलाव न्याय को मजबूत बनाएगा।

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अब अदालतों में जन्म पत्री या कुंडली दिखाकर उम्र साबित करना संभव नहीं रहेगा। दिल्ली हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में स्पष्ट किया है कि व्यक्ति की जन्मतिथि की पुष्टि केवल सरकारी दस्तावेजों से ही मानी जाएगी। यह निर्णय हाल ही में एक पुराने अपहरण और यौन शोषण के मामले में आया, जहां आरोपी को नाबालिग न ठहराए जाने पर राहत मिली। इस फैसले से कानूनी प्रक्रियाओं में पारदर्शिता बढ़ेगी।

जन्म पत्री अब नहीं चलेगी! दिल्ली हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, केवल ये सरकारी दस्तावेज ही माना जाएगा उम्र का असली सबूत

मामले की पूरी कहानी

यह केस 13 साल पुराना है। दिल्ली पुलिस ने एक युवक पर नाबालिग लड़की के अपहरण और उसके साथ दुर्व्यवहार का आरोप लगाया था। निचली अदालत ने आरोपी की उम्र 18 साल से ज्यादा पाए जाने पर उसे बरी कर दिया। राज्य पक्ष ने हाईकोर्ट में अपील की, लेकिन जस्टिस नवीन चावला और जस्टिस रविंदर डुडेजा की बेंच ने निचले फैसले को सही ठहराया। बेंच ने कहा कि अभियोजन पक्ष के जन्म पत्री, जच्चा बच्चा कार्ड और स्कूली प्रमाणपत्र जैसे दस्तावेज विश्वसनीय नहीं हैं। इनका आधार ज्योतिषीय गणना या अनौपचारिक जानकारी पर टिका था।

किन दस्तावेजों को खारिज किया गया

कोर्ट ने जन्म पत्री को ज्योतिष आधारित दस्तावेज बताते हुए खारिज किया। जच्चा बच्चा कार्ड को भी अपर्याप्त माना गया, क्योंकि यह चिकित्सकीय प्रमाणन का हिस्सा नहीं। अगर स्कूल के कागजात जन्म पत्री पर निर्भर हैं, तो वे भी अमान्य हो जाते हैं। ऐसे दस्तावेजों पर भरोसा करने से न्याय प्रक्रिया कमजोर पड़ती है। कोर्ट ने जोर दिया कि साक्ष्य कानून केवल आधिकारिक रिकॉर्ड को मान्यता देता है।

कौन से दस्तावेज अब मान्य

उम्र साबित करने के लिए अब ये सरकारी दस्तावेज ही मानक होंगे:

  • जन्म प्रमाण पत्र, जो नगर निगम या रजिस्ट्रार कार्यालय से जारी हो।
  • पासपोर्ट, ड्राइविंग लाइसेंस या PAN कार्ड, जिनमें जन्मतिथि दर्ज हो।
  • दसवीं या बारहवीं कक्षा की बोर्ड मार्कशीट।
  • वोटर आईडी कार्ड या अन्य सरकारी पहचान पत्र।
    आधार कार्ड को सीमित रूप से स्वीकारा जा सकता है, लेकिन प्राथमिक प्रमाण जन्म प्रमाण पत्र ही रहेगा। विवाद की स्थिति में ossification टेस्ट या मेडिकल जांच करानी पड़ सकती है।

कानूनी और सामाजिक असर

यह फैसला POCSO जैसे संवेदनशील मामलों के अलावा विवाह, नौकरी, पेंशन और संपत्ति विवादों पर भी लागू होगा। ग्रामीण इलाकों में जहां जन्म पत्री आम है, वहां लोगों को सरकारी जन्म प्रमाण पत्र बनवाना जरूरी हो गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि इससे अंधविश्वास कम होगा और न्याय व्यवस्था मजबूत बनेगी। सरकार को जागरूकता कार्यक्रम चलाने चाहिए ताकि लोग समय रहते दस्तावेज तैयार कर सकें। यह कदम भारतीय साक्ष्य अधिनियम को मजबूत करता है।

Author
info@sargujauniversity.in

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