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पाकिस्तान के खजाने से 3 गुना ज्यादा सोना! इस भारतीय कंपनी के पास है 205 टन गोल्ड; जानें

भारत की मुथूट फाइनेंस के पास 205 टन सोना जमा है, जो पाकिस्तान के 65 टन भंडार से तीन गुना अधिक। गोल्ड लोन से मजबूत अर्थव्यवस्था का संकेत।

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सोने की चमक आज वैश्विक अर्थव्यवस्था में एक नया संदेश दे रही है। भारत की अग्रणी वित्तीय कंपनी मुथूट फाइनेंस के पास ग्राहकों द्वारा गिरवी रखे गए सोने के रूप में 205 टन शुद्ध सोना जमा है। यह मात्रा पाकिस्तान के केंद्रीय बैंक के आधिकारिक भंडार से लगभग तीन गुना ज्यादा है, जहां मात्र 65 टन सोना उपलब्ध है। यह तथ्य निजी क्षेत्र की ताकत और पड़ोसी देश की आर्थिक चुनौतियों को स्पष्ट रूप से दर्शाता है।

पाकिस्तान के खजाने से 3 गुना ज्यादा सोना! इस भारतीय कंपनी के पास है 205 टन गोल्ड; जानें

मुथूट फाइनेंस की ताकत

मुथूट फाइनेंस देश की सबसे बड़ी गोल्ड लोन प्रदाता कंपनी है। यह ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में लाखों ग्राहकों को सोना गिरवी रखकर तत्काल ऋण उपलब्ध कराती है। वित्त वर्ष 2026 के तीसरे तिमाही तक कंपनी के पास 205 से 209 टन तक सोना कोलैटरल के रूप में सुरक्षित है। लोन का औसत मूल्य सोने के 57 प्रतिशत तक सीमित रखा जाता है, जिससे 43 प्रतिशत का सुरक्षा कवच बना रहता है। इस साल गोल्ड लोन पोर्टफोलियो में 45 प्रतिशत की वृद्धि का अनुमान है। हालांकि सोने के बढ़ते दामों से टनेज में हल्की कमी आई है। कंपनी की यह रणनीति न केवल जोखिम न्यूनतम रखती है, बल्कि वित्तीय समावेशन को बढ़ावा भी देती है।

पाकिस्तान का स्थिर भंडार

पाकिस्तान का स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान पिछले कई वर्षों से सोने का भंडार स्थिर रखे हुए है। जनवरी 2026 तक 64.76 टन सोना ही उपलब्ध है, जिसका बाजार मूल्य सोने की कीमतों में उछाल से 10.37 अरब डॉलर तक पहुंच गया। वैश्विक सूची में यह 44वें से 49वें स्थान के आसपास घूम रहा है। आर्थिक अस्थिरता, विदेशी मुद्रा संकट और अंतरराष्ट्रीय सहायता पर निर्भरता ने नए सोने की खरीद को असंभव बना दिया है। इसके विपरीत भारत का रिजर्व बैंक 880 टन से अधिक सोना रखता है, जो दुनिया में सातवें क्रम पर है।

आंकड़ों की तुलना

मुथूट फाइनेंस के पास 205-209 टन सोना ग्राहक गिरवी के रूप में है, जबकि पाकिस्तान के पास सरकारी रिजर्व में केवल 64.76 टन। मुथूट का सोना बाजार दरों पर आधारित मूल्य रखता है, वहीं पाकिस्तान का भंडार 10.37 अरब डॉलर का आंका गया है। यह अंतर निजी कंपनी की सफलता को रेखांकित करता है। वर्तमान तिमाही में मुथूट की स्थिति मजबूत बनी हुई है।

आर्थिक संकेत और भविष्य

सोने की कीमतें प्रति 10 ग्राम 75,000 रुपये को पार कर चुकी हैं, जो ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति दे रही हैं। आरबीआई ने पिछले साल 64 टन सोना विदेश से वापस लाकर घरेलू सुरक्षा मजबूत की। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसी कंपनियां संकटकाल में सोने को सुरक्षित निवेश सिद्ध कर रही हैं। मुथूट के शेयरों पर निवेशकों की नजर है, जिनका लक्ष्य मूल्य 3,478 रुपये तक हो सकता है। यह तस्वीर भारतीय वित्तीय प्रणाली की मजबूती दिखाती है। आगे सोने की कीमतें और नीतियां इस प्रवृत्ति को आकार देंगी। निजी क्षेत्र की यह उड़ान देश की आर्थिक प्रगति का प्रतीक बनेगी।

Author
info@sargujauniversity.in

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