बैंक बचत खातों में न्यूनतम राशि बनाए रखना अब ग्राहकों के लिए चुनौती बन गया है। बाजार में खबरें हैं कि कई बैंकों ने शहरी क्षेत्रों में औसत मासिक शेषराशि को 5000 रुपये तक बढ़ा दिया है। इससे पेनल्टी के रूप में मासिक कटौती का बोझ बढ़ा है, खासकर मध्यम वर्ग के लोगों पर। वित्तीय नियामक ने बैंकों को यह लचीलापन दिया है कि वे अपनी नीतियां तय करें, लेकिन ग्रामीण इलाकों में यह सीमा कम रखी गई है।

Table of Contents
नियमों का आधार और प्रभाव
बचत खातों में न्यूनतम बैलेंस की जरूरत खाते के प्रकार और स्थान पर निर्भर करती है। शहरों में 3000 से 10000 रुपये तक की रेंज आम है, जबकि गांवों में 1000 से 2000 रुपये पर्याप्त माने जाते हैं। यदि शेषराशि कम रहती है तो ब्याज आधारित पेनल्टी लगती है, जो 5 से 6 प्रतिशत तक या निश्चित राशि के रूप में वसूली जाती है। पिछले वित्तीय वर्ष में बैंकों ने ऐसी कमियों से हजारों करोड़ रुपये एकत्र किए, जो ग्राहकों के लिए सबक है। जीरो बैलेंस वाले खाते जैसे जन धन योजना इससे मुक्त हैं।
बड़े बैंकों की नीतियां
विभिन्न बैंकों के नियम अलग अलग हैं। सरकारी बैंकों में मेट्रो क्षेत्रों के लिए 1000 से 3000 रुपये की न्यूनतम राशि तय है, जहां पेनल्टी 50 से 100 रुपये मासिक होती है। निजी क्षेत्र के एक प्रमुख बैंक ने अगस्त 2025 से शहरी खातों के लिए 50000 रुपये की सीमा लगाई, जिस पर 500 रुपये तक कटौती संभव है। एक अन्य बैंक ने हाल ही में फरवरी 2026 से इसे घटाकर 2000 रुपये किया। अन्य निजी बैंकों में 5000 से 10000 रुपये की रेंज है, पेनल्टी 250 से 600 रुपये तक।
| बैंक वर्ग | मेट्रो न्यूनतम (रुपये) | पेनल्टी रेंज (मासिक) |
|---|---|---|
| सरकारी बैंक | 1000-3000 | 50-100 |
| प्रमुख निजी | 50000 | 500 तक |
| अन्य निजी | 2000-10000 | 250-600 |
ग्राहकों की परेशानी और समाधान
स्थानीय व्यापारी कहते हैं कि पहले कम राशि पर्याप्त थी, अब नकदी प्रबंधन कठिन हो गया। लगातार कमी पर खाता बंद होने का जोखिम भी है। बचाव के उपाय आसान हैं: एसएमएस अलर्ट सक्रिय करें, स्वचालित ट्रांसफर लगाएं या शून्य बैलेंस खाता अपनाएं। बैंकों को पारदर्शिता बरतने के निर्देश हैं, फिर भी कई ग्राहक अनजान रहते हैं।
















