भारतीय बाजारों में सोने की कीमतों पर आज बड़ा धक्का लगा है। 24 कैरेट शुद्ध सोने का 10 ग्राम दाम घटकर 1.51 लाख रुपये के आसपास पहुंच गया, जो बीते दिन के मुकाबले करीब तीन प्रतिशत की तेज गिरावट को दर्शाता है। यह बदलाव करीब चार हजार छह सौ रुपये प्रति दस ग्राम का नुकसान है। बाजार के जानकार इसे वैश्विक आर्थिक हलचलों का नतीजा बता रहे हैं, खासकर अमेरिकी केंद्रीय बैंक की ताजा नीतिगत बैठक के फैसलों का असर साफ दिख रहा है।

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शहरों में आज के भाव
शहर दर शहर भावों पर नजर डालें तो स्थिति एक जैसी ही है। प्रमुख केंद्रों में 24 कैरेट सोने का औसत भाव 1.51 लाख रुपये प्रति दस ग्राम रहा, जबकि 22 कैरेट का करीब 1.39 लाख रुपये। दिन भर में भाव ऊंचे स्तर 1.53 लाख तक पहुंचे, लेकिन अंत में निचले पायदान पर बंद हुए। कल के 1.54 लाख से आज की यह कमी बाजार में बिकवाली के दबाव को जाहिर करती है। दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और चेन्नई जैसे हबों पर ज्वेलर्स और निवेशक इस उतारचढ़ाव को भांपते हुए सौदे करने में जुटे दिखे।
फेड मीटिंग का असर
इस गिरावट की जड़ में अमेरिकी फेडरल रिजर्व की नीतियां हैं। वहां ब्याज दरों पर अपेक्षा से नरम रवैया अपनाए जाने से डॉलर की मजबूती बढ़ी, जिसका सीधा असर सोने जैसे कीमती धातुओं पर पड़ा। वैश्विक बाजार में सोने का भाव प्रति औंस चार हजार आठ सौ तीस डॉलर के आसपास लटक रहा, जो निवेशकों के बीच हिचक पैदा कर रहा है। भारत में रुपये की स्थिति, आयात लागत और विदेशी मांग ने भी इस दबाव को बढ़ाया। अर्थव्यवस्था में सुधार के संकेतों के बीच सोना अब उतना सुरक्षित निवेश नहीं लग रहा जितना पहले था।
मार्च का उतार-चढ़ाव
मार्च महीने का रुख देखें तो सोने ने शुरू में शानदार उड़ान भरी। पहले सप्ताह में भाव 1.62 लाख से चढ़कर 1.69 लाख के उच्चतम पर पहुंचे। लेकिन उसके बाद लगातार नीचे की ओर रुख किया। मध्य मार्च तक यह 1.52 लाख के निचले स्तर पर आ गया और आज फिर फिसला। पूरे महीने में सात प्रतिशत के करीब कमी हो चुकी है, जो निवेशकों के लिए चिंता का विषय है। भू-राजनीतिक तनावों के बावजूद आर्थिक स्थिरता ने सोने की चमक कम कर दी।
निवेशकों के लिए सलाह
अब सवाल उठता है कि यह गिरावट खरीदारों के लिए वरदान है या हाल में ऊंचे दामों पर सोना ले चुके लोगों के लिए आफत। गिरते भावों पर खरीदारी करना लंबे समय के निवेशकों के लिए फायदे का सौदा हो सकता है, बशर्ते वैश्विक समर्थन स्तर पर नजर रखी जाए। ज्वेलर्स का कहना है कि शादियों और त्योहारों के मौसम में मांग बढ़ सकती है। लेकिन ऊंचाई पर खरीद चुके निवेशकों को धैर्य रखना होगा। आने वाले हफ्तों में फेड के अगले कदम और स्थानीय कारकों पर सबकी नजर टिकी है। बाजार की अस्थिरता में सतर्क निवेश ही समझदारी है। क्या यह खरीद का सही समय है, समय ही बताएगा।
















