
देश के करोड़ों बिजली उपभोक्ताओं के लिए एक ऐतिहासिक और राहत भरी खबर सामने आई है लंबे समय से स्मार्ट मीटर के नाम पर बिजली विभाग की कथित मनमानी और जबरन मीटर बदले जाने की शिकायतों के बाद, अब केंद्र सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि बिना उपभोक्ता की रजामंदी के कोई भी स्मार्ट प्रीपेड मीटर नहीं लगाया जा सकता।
केंद्रीय ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने हाल ही में लोकसभा में एक प्रश्न के उत्तर में यह साफ किया कि स्मार्ट मीटर को प्रीपेड मोड (पहले रिचार्ज, फिर बिजली) में चलाना पूरी तरह से उपभोक्ता की अपनी स्वतंत्र इच्छा और सहमति पर निर्भर है, सरकार किसी भी मौजूदा उपभोक्ता पर प्रीपेड व्यवस्था थोपने का इरादा नहीं रखती है।
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प्रमुख कानूनी अधिकार और नियम (विद्युत अधिनियम 2003)
विद्युत अधिनियम और हालिया सरकारी घोषणाओं के तहत उपभोक्ताओं को ये महत्वपूर्ण अधिकार मिले हैं:
- विकल्प का अधिकार: विद्युत अधिनियम 2003 की धारा 47(5) के तहत, उपभोक्ताओं को पोस्टपेड (बिल आने पर भुगतान) या प्रीपेड मीटर चुनने का कानूनी अधिकार है।
- लिखित सहमति अनिवार्य: केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (CEA) के संशोधित नियमों के अनुसार, स्मार्ट प्रीपेड मीटर केवल उपभोक्ता की लिखित सहमति या नए कनेक्शन की स्थिति में ही लगाए जा सकते हैं।
- सुरक्षा राशि (Security Deposit) की वापसी: यदि कोई उपभोक्ता अपनी मर्जी से प्रीपेड विकल्प चुनता है, तो बिजली कंपनियों को उसकी जमा सुरक्षा राशि बिलों के माध्यम से वापस या समायोजित करनी होगी।
- अनिवार्यता खत्म: केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (CEA) ने 1 अप्रैल, 2026 से लागू अपनी अधिसूचना में ‘प्रीपेड मोड’ की अनिवार्यता वाली क्लॉज को हटा दिया है।
उत्तर प्रदेश में बड़ा विरोध और परिषद की मांग
उत्तर प्रदेश में लगभग 70 लाख उपभोक्ताओं के मीटर उनकी सहमति के बिना प्रीपेड मोड में बदल दिए जाने के बाद विवाद गहरा गया था उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने इसे राष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताते हुए मांग की है कि:
- जिन उपभोक्ताओं के मीटर जबरन प्रीपेड किए गए हैं, उन्हें तत्काल पोस्टपेड में बदला जाए।
- बिना सहमति मीटर लगाने वाली कंपनियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
उपभोक्ता क्या करें?
विशेषज्ञों के अनुसार, यदि बिजली विभाग के कर्मचारी जबरन आपका मीटर बदलना चाहते हैं, तो आप उन्हें अपनी लिखित सहमति न दें यदि आपकी अनुमति के बिना मीटर लगा दिया गया है, तो आप अपने राज्य के विद्युत नियामक आयोग या उपभोक्ता फोरम में औपचारिक शिकायत दर्ज करा सकते हैं।
















