
ग्रामीण क्षेत्रों में सिंचाई और पेयजल की किल्लत को दूर करने के लिए सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है, अब किसानों को अपने खेत या घर के पास हैंडपंप और बोरिंग लगवाने के लिए अपनी जेब खाली नहीं करनी होगी, उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों में ‘निःशुल्क बोरिंग योजना’ और ‘मुख्यमंत्री लघु सिंचाई योजना’ के तहत भारी छूट दी जा रही है।
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किसानों को मिलेगा सीधा लाभ
इस योजना का मुख्य उद्देश्य लघु और सीमांत किसानों को सिंचाई के आधुनिक साधन उपलब्ध कराना है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, सामान्य श्रेणी के किसानों को बोरिंग लागत पर ₹5,000 से ₹10,000 तक की मदद दी जा रही है, वहीं गहरे नलकूपों के लिए यह सहायता ₹1,00,000 तक पहुंच सकती है। अनुसूचित जाति और जनजाति (SC/ST) के किसानों के लिए जमीन की कोई न्यूनतम सीमा नहीं रखी गई है, जिससे वे भी इसका पूरा लाभ उठा सकें।
सोलर पंप पर भी 90% तक की छूट
सिर्फ हैंडपंप ही नहीं, सरकार PM-KUSUM योजना के जरिए बिजली और डीजल के बढ़ते खर्च से भी राहत दे रही है। इस योजना के तहत सोलर पंप लगवाने पर केंद्र और राज्य सरकार मिलकर 60% से 90% तक की सब्सिडी प्रदान कर रही हैं। किसान को कुल लागत का मात्र 10% ही वहन करना होगा।
इन दस्तावेजों की होगी जरूरत
आवेदन करने के लिए किसानों के पास निम्नलिखित दस्तावेज होने अनिवार्य हैं:
- आधार कार्ड
- खसरा-खतौनी (जमीन के दस्तावेज)
- बैंक पासबुक की फोटोकॉपी
- जाति और आय प्रमाण पत्र
- पासपोर्ट साइज फोटो
रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया: स्टेप-बाय-स्टेप गाइड
योजना का लाभ लेने के लिए किसान भाई इन चरणों का पालन कर सकते हैं:
- उत्तर प्रदेश के किसान miuponline.in या upagriculture.com पर लॉगिन करें।
- होमपेज पर ‘निःशुल्क बोरिंग’ या ‘सोलर पंप’ विकल्प को चुनें।
- अपनी व्यक्तिगत जानकारी और जमीन का ब्यौरा भरें।
- मांगे गए सभी जरूरी कागजात स्कैन करके अपलोड करें।
- फॉर्म जमा होने के बाद विभाग के बोरिंग टेक्नीशियन स्थल का निरीक्षण करेंगे और रिपोर्ट के आधार पर अनुदान राशि स्वीकृत की जाएगी।
सोशल मीडिया पर चल रहे ‘फ्री हैंडपंप’ के भ्रामक विज्ञापनों से बचें। केवल सरकारी वेबसाइट्स (. gov.in) के माध्यम से ही पंजीकरण करें। किसी भी अनजान व्यक्ति को पंजीकरण के नाम पर पैसे न दें।
















