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तलाक के बाद पति की संपत्ति पर पत्नी का कितना हक? सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला; एलीमनी और प्रॉपर्टी के ये नियम बदल देंगे आपकी सोच

सुप्रीम कोर्ट ने तलाक के बाद पत्नी के अधिकारों और एलीमनी (भरण-पोषण) को लेकर एक क्रांतिकारी फैसला सुनाया है, जो आने वाले समय में वैवाहिक विवादों के निपटारे की दिशा बदल सकता है, अदालत ने स्पष्ट किया है कि एक तलाकशुदा पत्नी केवल 'जीवित रहने' के लिए नहीं, बल्कि उसी 'जीवन स्तर' (Standard of Living) को बनाए रखने की हकदार है, जो उसने अपने वैवाहिक घर में अनुभव किया था

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तलाक के बाद पति की संपत्ति पर पत्नी का कितना हक? सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला; एलीमनी और प्रॉपर्टी के ये नियम बदल देंगे आपकी सोच
तलाक के बाद पति की संपत्ति पर पत्नी का कितना हक? सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला; एलीमनी और प्रॉपर्टी के ये नियम बदल देंगे आपकी सोच

सुप्रीम कोर्ट ने तलाक के बाद पत्नी के अधिकारों और एलीमनी (भरण-पोषण) को लेकर एक क्रांतिकारी फैसला सुनाया है, जो आने वाले समय में वैवाहिक विवादों के निपटारे की दिशा बदल सकता है, अदालत ने स्पष्ट किया है कि एक तलाकशुदा पत्नी केवल ‘जीवित रहने’ के लिए नहीं, बल्कि उसी ‘जीवन स्तर’ (Standard of Living) को बनाए रखने की हकदार है, जो उसने अपने वैवाहिक घर में अनुभव किया था। 

संपत्ति पर अधिकार: अब केवल ‘नाम’ ही काफी नहीं

आमतौर पर माना जाता है कि पति की स्व-अर्जित संपत्ति पर पत्नी का हक नहीं होता, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इसे लेकर एक नई मिसाल पेश की है: 

  • वैवाहिक घर (Matrimonial Home): राखी साधुखान बनाम राजा साधुखान (2025) मामले में कोर्ट ने पति को आदेश दिया कि वह उस घर का मालिकाना हक पत्नी के नाम ट्रांसफर करे जिसमें वह रह रही है।
  • लोन की जिम्मेदारी: कोर्ट ने यह भी साफ किया कि घर ट्रांसफर करने के साथ-साथ उस पर बकाया सारा होम लोन भी पति को ही चुकाना होगा
  • स्त्रीधन पर पूर्ण स्वामित्व: कोर्ट ने दोहराया कि शादी में मिले गहने, नकदी और उपहार (स्त्रीधन) पर केवल पत्नी का अधिकार है और तलाक के समय इसे लौटाना अनिवार्य है। 

एलीमनी के नए और सख्त नियम

अदालत ने एलीमनी की राशि तय करने के पुराने ढर्रे को बदलते हुए इसे ‘महंगाई और गरिमा’ से जोड़ दिया है:

  • 2.5 गुना तक की बढ़ोतरी: कई मामलों में कोर्ट ने हाई कोर्ट द्वारा तय एलीमनी को दोगुना से ज्यादा बढ़ा दिया है। उदाहरण के लिए, ₹20,000 की मासिक राशि को बढ़ाकर सीधे ₹50,000 कर दिया गया।
  • महंगाई भत्ता (5% Hike): सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया है कि एलीमनी की राशि स्थिर नहीं रहेगी अब से हर 2 साल में इसमें 5% की बढ़ोतरी अनिवार्य रूप से की जाएगी ताकि पत्नी पर महंगाई की मार न पड़े।
  • शिक्षा या डिग्री का बहाना नहीं: पति अब यह तर्क देकर एलीमनी से नहीं बच सकते कि पत्नी शिक्षित है या काम कर सकती है। कोर्ट के अनुसार, वास्तविक ‘कमाने की क्षमता’ और वर्तमान स्थिति को देखना जरूरी है।

शून्य विवाह (Void Marriages) में भी हक

एक और महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण में कोर्ट ने कहा कि यदि किसी तकनीकी कारण से शादी को ‘शून्य’ (जैसे दूसरी शादी) घोषित कर दिया जाता है, तब भी पत्नी धारा 25 (हिंदू विवाह अधिनियम) के तहत एलीमनी पाने की हकदार है, कानून का मकसद महिला को बेसहारा छोड़ना नहीं है। 

अनुच्छेद 142 का विशेष उपयोग

सुप्रीम कोर्ट अपनी विशेष शक्तियों (Article 142) का इस्तेमाल कर उन शादियों को तुरंत खत्म कर सकता है जिनमें सुलह की कोई गुंजाइश नहीं बची है, ऐसे मामलों में कोर्ट अक्सर भारी-भरकम एकमुश्त एलीमनी (Lump-sum Alimony) (जैसे ₹50 लाख से ₹1.25 करोड़ तक) तय कर रहा है ताकि पत्नी का भविष्य सुरक्षित रहे। 

सुप्रीम कोर्ट के इन फैसलों से साफ है कि अब तलाक के मामलों में केवल कानूनी औपचारिकताएं नहीं, बल्कि महिला की आर्थिक गरिमा और सामाजिक सुरक्षा को प्राथमिकता दी जा रही है।

After Divorce How Much Right Does a Wife Have on Her Husband Property
Author
info@sargujauniversity.in

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