
भारत अपनी विशाल नदी प्रणालियों के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध है, इनमें से एक नदी ऐसी है, जिसके पास न केवल देश की दूसरी सबसे लंबी नदी होने का ‘खिताब’ है, बल्कि इसके जलमार्ग पर बांधों (Dams) की संख्या भी सबसे अधिक है, हम बात कर रहे हैं गोदावरी नदी की, जिसे प्रायद्वीपीय भारत की जीवनरेखा माना जाता है।
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भारत का सबसे बड़ा बांध नेटवर्क
गोदावरी नदी के बेसिन को देश का सबसे सघन बांध नेटवर्क वाला क्षेत्र माना जाता है, एक अनुमान के मुताबिक, गोदावरी और इसकी सहायक नदियों (जैसे प्राणहिता, इंद्रावती और मंजीरा) पर 350 से अधिक छोटे और बड़े बांध बनाए गए हैं। यह संख्या भारत के किसी भी अन्य नदी बेसिन की तुलना में काफी अधिक है। इन बांधों का मुख्य उद्देश्य सिंचाई, जलविद्युत उत्पादन और बाढ़ नियंत्रण है।
क्यों कहलाती है ‘दक्षिण गंगा’?
गंगा के बाद, गोदावरी भारत की दूसरी सबसे लंबी नदी है, जिसकी कुल लंबाई लगभग 1,465 किलोमीटर है, अपनी विशाल लंबाई और हिंदुओं के लिए इसके अत्यधिक आध्यात्मिक व धार्मिक महत्व के कारण इसे ‘दक्षिण गंगा’ या ‘वृद्ध गंगा’ के नाम से भी पुकारा जाता है।
प्रमुख विशेषताएं और रोचक तथ्य
- उद्गम स्थल: यह महाराष्ट्र के नासिक जिले में त्रयंबकेश्वर की पहाड़ियों से निकलती है。
- इन राज्यों से होकर बहती है: इसका सफर महाराष्ट्र से शुरू होकर तेलंगाना, छत्तीसगढ़ और आंध्र प्रदेश तक फैला हुआ है, जिसके बाद यह बंगाल की खाड़ी में जाकर मिल जाती है।
- मुख्य सिंचाई प्रोजेक्ट: इस नदी पर पोचमपैडू (श्रीराम सागर), जायकवाड़ी और पोलावरम जैसी विशाल परियोजनाएं स्थित हैं। दुनिया का सबसे बड़ा मल्टी-स्टेज लिफ्ट सिंचाई प्रोजेक्ट ‘कालेश्वरम’ भी इसी नदी प्रणाली का हिस्सा है।
गोदावरी का विशाल बेसिन भारत के कुल क्षेत्रफल का लगभग 10% हिस्सा कवर करता है, जो इसे देश के कृषि और आर्थिक विकास के लिए बेहद महत्वपूर्ण बनाता है।
















