
शहरी इलाकों में किराए के मकान में रहने वालों के लिए अक्सर यह चिंता का विषय रहता है कि मकान मालिक साल भर बाद किराया कितना बढ़ाएगा, क्या इसके लिए कोई तय सीमा है? केंद्र सरकार द्वारा लाए गए ‘मॉडल टेनेंसी एक्ट’ (Model Tenancy Act) के नियम इस संबंध में स्थिति साफ करते हैं।
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समझौते (Rent Agreement) की अहमियत
मॉडल टेनेंसी एक्ट के अनुसार, किराए में कितनी बढ़ोतरी होगी, यह पूरी तरह से मकान मालिक और किरायेदार के बीच हुए लिखित समझौते पर निर्भर करता है। कानून में 5% या 10% जैसी कोई निश्चित सीमा तय नहीं की गई है। एग्रीमेंट में जो शर्त लिखी होगी, उसी के आधार पर किराया बढ़ाया जा सकेगा।
अचानक नहीं बढ़ा सकते किराया
मकान मालिक अपनी मर्जी से बीच में कभी भी किराया नहीं बढ़ा सकता। अगर वह किराया बढ़ाना चाहता है, तो उसे किरायेदार को कम से कम 3 महीने पहले लिखित नोटिस देना अनिवार्य है। बिना नोटिस के की गई बढ़ोतरी अवैध मानी जाएगी।
रेंट एग्रीमेंट का नवीनीकरण
यदि रेंट एग्रीमेंट की अवधि समाप्त हो जाती है और नया एग्रीमेंट नहीं बनता है, तो मकान मालिक पुराने नियमों के आधार पर ही किराया ले सकता है हालांकि, अगर किरायेदार घर खाली नहीं करता, तो मकान मालिक को मुआवजे के तौर पर बढ़ा हुआ किराया मांगने का अधिकार मिलता है।
सिक्योरिटी डिपॉजिट की सीमा
नया कानून किरायेदारों को भारी-भरकम सिक्योरिटी डिपॉजिट से भी राहत देता है, रिहायशी मकानों (Residential) के लिए मकान मालिक अधिकतम 2 महीने का किराया ही एडवांस या सिक्योरिटी के रूप में ले सकता है, कमर्शियल प्रॉपर्टी के लिए यह सीमा 6 महीने की है।
विवाद होने पर कहाँ जाएं?
किराए की बढ़ोतरी या अन्य विवादों को सुलझाने के लिए इस एक्ट के तहत ‘रेंट अथॉरिटी’ (Rent Authority) और ‘रेंट कोर्ट’ के गठन का प्रावधान है। अब ऐसे मामले सिविल कोर्ट के बजाय इन विशेष प्राधिकरणों में तेजी से निपटाए जाते हैं।
अगर आप किरायेदार हैं, तो रेंट एग्रीमेंट साइन करते समय ‘रेंट रिवीज़न’ (Rent Revision) क्लॉज को ध्यान से पढ़ें, क्योंकि वही आपकी सुरक्षा का सबसे बड़ा आधार है।
















