
भारत विविधताओं का देश है और यहाँ के हर राज्य, जिले और शहर का अपना एक अलग इतिहास और पहचान है लेकिन क्या आप जानते हैं कि हमारे देश में एक ऐसा जिला भी है जिसका नाम हिंदी वर्णमाला के महज दो अक्षरों से मिलकर बना है? जनरल नॉलेज (GK) के बड़े-बड़े धुरंधर भी अक्सर इस सवाल का जवाब देने में मात खा जाते हैं, उत्तर प्रदेश का यह जिला न केवल अपने छोटे नाम के लिए, बल्कि अपनी समृद्ध ऐतिहासिक विरासत और बुनकरी उद्योग के लिए भी मशहूर है।
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कौन सा है यह अनोखा जिला?
हम बात कर रहे हैं उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल क्षेत्र में स्थित ‘मऊ’ (Mau) जिले की, यह भारत का इकलौता जिला है जिसके नाम में हिंदी के सिर्फ दो अक्षर ‘म’ और ‘ऊ’ आते हैं इसे उत्तर प्रदेश में सबसे छोटे नाम वाला जिला माना जाता है।
मऊ जिले की खास बातें और इतिहास
मऊ जिला अपनी खास भौगोलिक स्थिति और व्यापारिक महत्व के कारण जाना जाता है, इसके बारे में कुछ रोचक तथ्य निम्नलिखित हैं:
- मऊ पहले आजमगढ़ जिले का हिस्सा था इसे 19 नवंबर 1988 को आजमगढ़ से अलग कर एक स्वतंत्र जिले का दर्जा दिया गया था।
- इसे ऐतिहासिक रूप से ‘मऊनाथ भंजन’ के नाम से जाना जाता रहा है। ‘मऊ’ शब्द का अर्थ कुछ विद्वान ‘पड़ाव’ या ‘शिविर’ भी बताते हैं।
- मऊ को पूर्वांचल का ‘मैनचेस्टर’ भी कहा जाता है यह जिला अपने हथकरघा (Handloom) और पावरलूम उद्योग, विशेष रूप से सिल्क साड़ियों के निर्माण के लिए देश-विदेश में प्रसिद्ध है।
- पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, त्रेता युग में यह क्षेत्र ऋषियों की तपोभूमि था यहाँ बहने वाली तमसा नदी के तट पर ही महर्षि वाल्मीकि का आश्रम था और माना जाता है कि भगवान श्री राम ने अपने वनवास की पहली रात यहीं विश्राम किया था।
GK के लिए क्यों है महत्वपूर्ण?
अक्सर प्रतियोगी परीक्षाओं और क्विज़ में भारत के सबसे बड़े (कच्छ, गुजरात) या सबसे छोटे (माहे, पुडुचेरी) जिलों के बारे में पूछा जाता है, लेकिन ‘नाम की लंबाई’ के आधार पर मऊ एक अनूठा उदाहरण पेश करता है, जो इसे चर्चा का विषय बनाता है।
















