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ट्रेन के डिब्बे पर लिखे इन 5 नंबरों का क्या है मतलब? जान लें इस ‘सीक्रेट’ कोड; का राज

भारतीय रेलवे को दुनिया का चौथा सबसे बड़ा रेल नेटवर्क माना जाता है हर रोज करोड़ों यात्री ट्रेन से सफर करते हैं, लेकिन क्या आपने कभी गौर किया है कि ट्रेन के डिब्बों (Coaches) के बाहर एक खास 5 अंकों का नंबर लिखा होता है? ज्यादातर यात्री इसे महज एक पहचान संख्या मानकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन रेलवे की भाषा में यह एक 'सीक्रेट कोड' है, जिसमें कोच से जुड़ी बेहद महत्वपूर्ण जानकारी छिपी होती है

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ट्रेन के डिब्बे पर लिखे इन 5 नंबरों का क्या है मतलब? जान लें इस 'सीक्रेट' कोड; का राज
ट्रेन के डिब्बे पर लिखे इन 5 नंबरों का क्या है मतलब? जान लें इस ‘सीक्रेट’ कोड; का राज

भारतीय रेलवे को दुनिया का चौथा सबसे बड़ा रेल नेटवर्क माना जाता है हर रोज करोड़ों यात्री ट्रेन से सफर करते हैं, लेकिन क्या आपने कभी गौर किया है कि ट्रेन के डिब्बों (Coaches) के बाहर एक खास 5 अंकों का नंबर लिखा होता है? ज्यादातर यात्री इसे महज एक पहचान संख्या मानकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन रेलवे की भाषा में यह एक ‘सीक्रेट कोड’ है, जिसमें कोच से जुड़ी बेहद महत्वपूर्ण जानकारी छिपी होती है। 

शुरुआत के दो अंक: निर्माण का इतिहास 

ट्रेन के डिब्बे पर लिखे नंबर के पहले दो अंक उस कोच के निर्माण वर्ष (Year of Manufacture) को दर्शाते हैं उदाहरण के तौर पर, यदि किसी कोच पर 08437 लिखा है, तो इसका मतलब है कि उस डिब्बे का निर्माण साल 2008 में हुआ था। इसी तरह, 98337 नंबर वाला कोच 1998 में बनकर तैयार हुआ था। 

आखिरी तीन अंक: कोच की श्रेणी का खुलासा 

नंबर के अंतिम तीन अंक कोच की कैटेगरी या श्रेणी बताते हैं रेलवे ने अलग-अलग क्लास के लिए विशिष्ट नंबर रेंज तय की है, जिससे यह पता चलता है कि डिब्बा AC है, स्लीपर है या जनरल। 

इन नंबरों से पहचानें अपना कोच

  • 001 – 150: यदि आखिरी तीन अंक इस रेंज में हैं, तो वह AC कोच (फर्स्ट, सेकेंड या थर्ड AC) है।
  • 151 – 200: यह रेंज AC चेयर कार के लिए सुरक्षित है।
  • 201 – 400: अगर नंबर इस बीच है, तो वह स्लीपर क्लास (Sleeper Class) का डिब्बा है।
  • 401 – 600: यह नंबर जनरल कोच (Unreserved) की पहचान कराते हैं।
  • 601 – 700: यह सेकेंड क्लास सिटिंग (2S) के लिए इस्तेमाल होते हैं।
  • 701 – 800: ये अंक लगेज या ब्रेक वैन (SLR) को दर्शाते हैं।
  • 800 से ऊपर: 800 से अधिक के नंबर पेंट्री कार, जेनरेटर या मेल वैन के लिए होते हैं। 

क्यों जरूरी है यह जानकारी?

रेलवे विशेषज्ञों के अनुसार, इन नंबरों की मदद से यात्री आसानी से समझ सकते हैं कि जिस डिब्बे में वे सफर कर रहे हैं, वह कितना पुराना है और किस श्रेणी का है यह सिस्टम रेलवे के संचालन और रखरखाव (Maintenance) में भी अधिकारियों की बड़ी मदद करता है।

अगली बार जब आप स्टेशन पर ट्रेन का इंतजार करें, तो कोच पर लिखे इन नंबरों को देखकर आप भी एक ‘रेल एक्सपर्ट’ की तरह डिब्बे की पूरी कुंडली निकाल सकते हैं।

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info@sargujauniversity.in

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