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सोने-चांदी की कीमतों में ऐतिहासिक गिरावट! आसमान से सीधे जमीन पर आए रेट्स; जानें आज आपके शहर में 10 ग्राम गोल्ड का भाव

सोने और चांदी के दाम मार्च में तेजी से टूटे हैं। गोल्ड अपने हालिया ऊंचे स्तर से काफी नीचे आ गया है और सिल्वर में भी तेज गिरावट दिखी है। खरीदारों के लिए यह रेट कम होने का मौका है, लेकिन निवेशकों को सावधानी रखनी होगी।

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भारत में सोने और चांदी की कीमतें हाल के दिनों में बड़ी गिरावट के दौर से गुजरी हैं। कुछ ही हफ्तों में गोल्ड अपने ऊंचे स्तर से कई हजार रुपये प्रति 10 ग्राम तक सस्ता हो चुका है, जबकि चांदी में भी तेज करेक्शन देखा गया है। ऊंचे दाम पर खरीदने वालों के लिए यह गिरावट चिंता की वजह है, तो वहीं लंबे समय से मौका तलाश रहे निवेशकों और ज्वेलरी खरीदारों के लिए यह समय राहत लेकर आया है।

सोने-चांदी की कीमतों में ऐतिहासिक गिरावट! आसमान से सीधे जमीन पर आए रेट्स; जानें आज आपके शहर में 10 ग्राम गोल्ड का भाव

10 ग्राम सोने के रेट में भारी करेक्शन

मार्च 2026 के आखिरी हफ्ते में 24 कैरेट सोना 10 ग्राम के हिसाब से अपने हालिया रिकॉर्ड स्तर से काफी नीचे कारोबार कर रहा है। जहां कुछ समय पहले 10 ग्राम शुद्ध सोने के दाम आसमान छूते दिख रहे थे, वहीं अब कीमतों में स्पष्ट नरमी दिख रही है। 22 कैरेट सोने में भी यही रुझान है, यानी ज्यादातर शहरों में शादी ब्याह या सामान्य ज्वेलरी खरीदने वालों के लिए बजट पर थोड़ा बोझ कम हुआ है।

हाल के महीनों में सोना जिस तेजी से ऊपर गया था, उसी तेजी से अब उसने अपने ऊपरी दायरे से वापसी की है। शॉर्ट टर्म में यह गिरावट इतनी अधिक रही कि इसे पिछले कुछ वर्षों के बड़े करेक्शन में गिना जा रहा है। हालांकि लंबी अवधि के चार्ट पर देखें तो अब भी सोना कई साल पहले की तुलना में काफी ऊंचे स्तर पर ही है।

क्या यह गिरावट वाकई ऐतिहासिक है

कम समय में ऊंचे स्तर से तेज टूटन हमेशा निवेशकों की नजर में बड़ी घटना बन जाती है। सोने के मामले में भी ऐसा ही हुआ है, क्योंकि जनवरी से मार्च के बीच दामों ने एक तरफ तेज उछाल और दूसरी तरफ तेज गिरावट, दोनों ही फेज दिखा दिए। जिन्होंने ऊपरी रेट पर एंट्री ली थी, उन्हें इस समय नुकसान झेलना पड़ रहा है, जबकि पुराने निवेशक अभी भी कुल मिलाकर मुनाफे की पोजिशन में हैं।

पिछले 10 साल के ट्रैक रिकॉर्ड पर निगाह डालें तो साफ होता है कि सोने ने लंबी अवधि में मजबूत रिटर्न दिए हैं। लेकिन हर बड़े रैली फेज के बाद करेक्शन आना स्वाभाविक होता है और फिलहाल बाजार उसी फेज से गुजर रहा है। इसी वजह से बहुत से विशेषज्ञ इसे कीमतों का रिएलाइनमेंट मान रहे हैं, न कि ट्रेंड के पूरी तरह पलट जाने का संकेत।

शहरों में अलग अलग रेट, लेकिन ट्रेंड एक जैसा

देश के अलग अलग शहरों में टैक्स, मेकिंग चार्ज, स्थानीय मांग और सप्लाई की स्थिति के कारण रेट में कुछ फर्क जरूर रहता है, लेकिन ट्रेंड लगभग हर जगह एक जैसा है। महानगरों से लेकर टियर टू शहरों तक, 24 कैरेट और 22 कैरेट दोनों कैटेगरी में पिछले दिनों की तुलना में गोल्ड कुछ हद तक सस्ता दिख रहा है।

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ज्वेलरी शोरूम पर मिलने वाला अंतिम रेट हमेशा ऑनलाइन दिख रहे औसत भाव से थोड़ा बदल सकता है, इसलिए खरीदारी से पहले दिन का ताजा रेट और मेकिंग चार्ज अलग से पूछना जरूरी है। जिन शहरों में शादी का सीजन चल रहा है, वहां डिमांड थोड़ा ज्यादा होने से मामूली अंतर दिख सकता है।

चांदी की कीमतों में भी दबाव

चांदी की बात करें तो यहां भी कीमतों में ढील का माहौल बना हुआ है। चांदी के दाम किलो के हिसाब से ऊपरी स्तर से काफी नीचे आ चुके हैं, जिससे बर्तन, ज्वेलरी और इंडस्ट्रियल डिमांड वाले सेगमेंट पर असर दिख रहा है। आम तौर पर सोने के साथ चांदी भी एक ही दिशा में चलती है, इसलिए गोल्ड में करेक्शन का असर सिल्वर पर भी दिखाई दे रहा है।

चांदी की कीमतें सोने की तुलना में ज्यादा वोलाटाइल मानी जाती हैं, यानी तेजी और गिरावट दोनों ही फेज में मूवमेंट अपेक्षाकृत ज्यादा तेज हो सकता है। यही वजह है कि छोटे निवेशकों को चांदी में एंट्री या एग्जिट लेते वक्त ज्यादा सावधानी बरतनी पड़ती है।

गिरावट की असली वजह क्या है?

हाल में आई तेज गिरावट के पीछे घरेलू और वैश्विक दोनों तरह के कारक काम कर रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में डॉलर की मजबूती और बॉन्ड यील्ड में उछाल से सोने पर दबाव पड़ा है, क्योंकि निवेशकों ने सुरक्षित परिसंपत्तियों से पैसा निकालकर अन्य विकल्पों की ओर रुख किया। दूसरी तरफ घरेलू स्तर पर ऊंचे दामों पर की गई भारी खरीद के बाद प्रॉफिट बुकिंग बढ़ी है, जिससे फ्यूचर्स और स्पॉट दोनों मार्केट में कीमतें नरम पड़ी हैं।

कमोडिटी बाजार में अक्सर देखा जाता है कि जब भी कोई एसेट जल्दी भागता है, तो कुछ समय बाद उसमें करेक्शन अनिवार्य हो जाता है। फिलहाल यही पैटर्न सोने और चांदी में देखने को मिल रहा है।

इस समय क्या करें निवेशक और खरीदार

यदि आप लंबे समय के लिए निवेश करना चाहते हैं, तो करेक्शन के दौर में किस्तों में खरीदारी करने की रणनीति अपनाई जा सकती है। इससे रिस्क बंट जाता है और औसत खरीद मूल्य भी संतुलित रहता है। शादी या किसी खास अवसर के लिए ज्वेलरी लेनी हो, तो 2 से 3 दिन रेट का रुझान देख कर और अलग अलग ज्वेलर्स से रेट व मेकिंग चार्ज तुलना करके ही फाइनल खरीद करना समझदारी होगी।

सिर्फ भौतिक सोना ही विकल्प नहीं है। गोल्ड में निवेश के लिए गोल्ड ईटीएफ, डिजिटल गोल्ड और सरकारी गोल्ड बॉन्ड भी अच्छे विकल्प माने जाते हैं, जहां प्यूरीटी, स्टोरेज और सुरक्षा की चिंता कम होती है। हालांकि किसी भी तरह का निवेश करने से पहले अपने वित्तीय लक्ष्य, समय अवधि और रिस्क प्रोफाइल पर विचार करना जरूरी है।

Author
info@sargujauniversity.in

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