वैश्विक अर्थव्यवस्था की नई तस्वीर सामने आ रही है। प्रति व्यक्ति सकल घरेलू उत्पाद के आधार पर जारी ताजा रैंकिंग में छोटे-छोटे देशों ने बाजी मार ली है। यूरोप का लक्जमबर्ग इस सूची में शीर्ष पर पहुंच गया, जबकि भारत और अमेरिका जैसे विशालकाय टॉप-10 से बाहर हो गए। यह बदलाव देशों की आर्थिक रणनीति और जनसंख्या के बोझ को उजागर करता है।

प्रति व्यक्ति जीडीपी किसी देश की औसत आय को मापती है। कुल जीडीपी में अमेरिका सबसे आगे है, भारत पांचवें स्थान पर कायम है। लेकिन व्यक्ति विशेष के हिसाब से लक्जमबर्ग जैसे छोटे देश कूदकर आगे निकल गए। यहां बैंकिंग सेवाएं और कम करों का फायदा मिला। सिंगापुर, आयरलैंड और कतर जैसे राष्ट्र तेल, गैस तथा वित्तीय केंद्र बनकर चमके। भारत की 1.4 अरब आबादी औसत को नीचे खींचती है, जिससे रैंकिंग में पिछड़ना पड़ता है।
Table of Contents
शीर्ष 10 अमीर देशों की सूची
| रैंक | देश | प्रति व्यक्ति जीडीपी (अनुमानित, डॉलर में) |
|---|---|---|
| 1 | लक्जमबर्ग | 1,35,000 |
| 2 | सिंगापुर | 1,00,000 से अधिक |
| 3 | आयरलैंड | 95,000 से अधिक |
| 4 | कतर | 85,000 से अधिक |
| 5 | मकाऊ | 80,000 से अधिक |
| 6 | स्विट्जरलैंड | 75,000 से अधिक |
| 7 | नॉर्वे | 70,000 से अधिक |
| 8 | संयुक्त अरब अमीरात | 65,000 से अधिक |
| 9 | ब्रुनेई | 60,000 से अधिक |
| 10 | अमेरिका | 55,000 से अधिक |
भारत की चुनौतियां और अवसर
भारत का प्रति व्यक्ति जीडीपी 2,500 से 3,000 डॉलर के आसपास है, जो वैश्विक औसत से कम है। बड़ी जनसंख्या विकास को बांट देती है। फिर भी 7-8 प्रतिशत की विकास दर उम्मीद जगाती है। कौशल विकास, विनिर्माण को बढ़ावा और निवेश आकर्षण से सुधार संभव है। 2030 तक टॉप-50 में जगह बनाना लक्ष्य हो सकता है।
अमेरिका का पिछड़ना और छोटे देशों का उदय
अमेरिका कुल अर्थव्यवस्था में नंबर एक है, लेकिन छोटे प्रतिद्वंद्वियों से पीछे छूट गया। महंगाई और असमानता ने असर डाला। दूसरी ओर लक्जमबर्ग दिल्ली जितना क्षेत्र होने पर भी बैंकिंग हब है। लिकटेंस्टाइन जैसे अल्पाइन देश में न तो हवाई अड्डा है, न अपनी मुद्रा, फिर भी वित्तीय सेवाओं से शीर्ष पर। नॉर्वे का तेल कोष और कतर का गैस निर्यात ऐसे उदाहरण हैं।
















