आजकल कई लोग घर या जमीन की रजिस्ट्री पत्नी के नाम से करवाते हैं, ताकि स्टाम्प ड्यूटी कम देने या इनकम‑टैक्स में फायदा उठाने की कोशिश की जा सके। लेकिन हाल के वर्षों में भारत के कई हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के फैसलों ने इस प्रैक्टिस को बेहद जटिल बना दिया है। अब सिर्फ रजिस्ट्री पर जिसका नाम लिखा हो, वह खुद‑ब‑खुद असली मालिक नहीं माना जा रहा, बल्कि देखा जा रहा है कि पैसा किसकी आय से आया और संपत्ति खरीदने का इरादा क्या था।

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असली मालिक कौन है, यही सवाल है
कई हाईकोर्ट के फैसलों में साफ कहा गया है कि पत्नी के नाम पर संपत्ति खरीदना अपने आप में गलत या बेनामी डील नहीं माना जाएगा, बशर्ते यह साबित हो कि पैसा लीगल तरीके से आया है और उसकी खुद की आय या बचत से खरीदी गई हो। अगर पत्नी के पास खुद की आय, बैंक बैलेंस, गिफ्ट या विरासत का कोई ठोस साक्ष्य है, तो उसे असली मालिक मानने में दिक्कत नहीं होती। लेकिन अगर पत्नी के नाम पर बड़ी प्रॉपर्टी है, जबकि उसकी आधिकारिक आय बहुत कम है, और रिकॉर्ड में पति की आय का उपयोग साफ दिखता है, तो अदालतें पति को ही असली मालिक मान सकती हैं और रजिस्ट्री पर लिखे नाम को आधिकारिक तौर पर कमज़ोर मान सकती हैं।
बेनामी कानून और नए दायरे
2016 में लाया गया बेनामी संपत्ति कानून इसलिए बनाया गया था कि लोग असली मालिक बनकर अपना नाम छुपा कर दूसरों के नाम पर संपत्ति न खरीद सकें। इसके तहत अगर कोई यह साबित होता है कि पैसा एक शख्स ने दिया है, लेकिन नाम दूसरे का लिखवाया गया है और इसका इरादा कर बचाना, जब्ती से बचना या अन्य गैरकानूनी मकसद है, तो ऐसी संपत्ति को बेनामी मानकर जब्त किया जा सकता है। 2022 में सुप्रीम कोर्ट ने इस कानून के अंतर्गत तीन साल की कैद का प्रावधान रद्द कर दिया, लेकिन संपत्ति जब्त करने, दंड लगाने और वित्तीय जांच के अधिकार बरकरार रखे हैं। इसका मतलब है कि अब खतरा सिर्फ कैद का नहीं, बल्कि टैक्स, जब्ती और कानूनी लड़ाइयों का भी है।
टैक्स और जीवन‑संचालन पर असर
इनकम‑टैक्स डिपार्टमेंट अब पत्नी के नाम पर बड़ी संपत्ति होने पर ज़्यादा सख्ती से जांच कर रहा है। अगर पत्नी की आय कम लेकिन प्रॉपर्टी बड़ी है और रिकॉर्ड में यह दिखता है कि पैसा पति से आया है, तो यह संपत्ति गिफ्ट मानी जा सकती है और उस पर टैक्स लगाया जा सकता है। वहीं, अगर परिवार के बीच असली में दोस्ती या गिफ्ट का मकसद है, तो उसे गिफ्ट‑डीड जैसे दस्तावेज़ों से साफ रजिस्टर कराना बहुत ज़रूरी है। बिना साफ दस्तावेज़ के यह दिखाना मुश्किल हो जाता है कि यह सचमुच उपहार या वैध तरीके से दी गई संपत्ति है।
खरीदारों के लिए स्पष्ट सावधानी
अगर कोई व्यक्ति आज भी पत्नी के नाम पर प्रॉपर्टी खरीदने की सोच रहा है, तो उसे यह ज़रूर समझना चाहिए कि कानून की नज़र में नाम और असली मालिक दोनों अलग‑अलग चीज़ें हैं। सबसे सुरक्षित रास्ता यह है कि पत्नी की आय, बचत या गिफ्ट का क्लियर साक्ष्य रखें, जॉइंट नाम से रजिस्ट्री कराएं या गिफ्ट‑डीड जैसे दस्तावेज़ों के साथ लेन‑देन को कानूनी आधार दें। अपने राज्य के स्टाम्प ड्यूटी और इनकम‑टैक्स नियमों के अनुसार एक लोकल वकील या सीए से सलाह लेना भी बहुत ज़रूरी है। इस तरह से कानूनी जोखिम कम होंगे और घर खरीदने का फैसला भविष्य में भी चिंता की जगह नहीं बनेगा।
















